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धान बेचने किसानों का पंजीयन 31 अक्टूबर तक, एग्रीस्टैक फार्मर आईडी और खसरा लिंकिंग जरूरी

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धान बेचने किसानों का पंजीयन 31 अक्टूबर तक, एग्रीस्टैक फार्मर आईडी और खसरा लिंकिंग जरूरी


सूरजपुर, 18 अगस्त (हि.स.)।सूरजपुर जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों के पंजीयन और संशोधन की प्रक्रिया जारी है। किसान 31 अक्टूबर 2026 तक अपना पंजीयन करा सकते हैं। इस वर्ष सभी श्रेणी के किसानों के लिए एग्रीस्टैक पंजीयन अनिवार्य किया गया है। साथ ही धान खरीद के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे में दर्ज धान के रकबे को ही मान्य किया जाएगा। किसानों को अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय पर जरूरी प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी गई है।

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के निर्देशों के अनुसार 1 जुलाई से 31 अक्टूबर 2026 तक विभागीय वेबसाइट fcs.cg.gov.in के ऑनलाइन सोसायटी मॉड्यूल के माध्यम से नए किसान पंजीयन और पहले से दर्ज फसल एवं रकबे में संशोधन किया जा सकेगा। इस वर्ष किसानों के लिए एग्रीस्टैक फार्मर आईडी होना जरूरी है। धान बेचने के लिए जिन खसरों की भूमि का उपयोग किया जाना है, उन सभी खसरों की फार्म आईडी को किसान की फार्मर आईडी से लिंक करना अनिवार्य होगा।

धान खरीद के लिए इस वर्ष डिजिटल क्रॉप सर्वे में दर्ज धान के रकबे को ही मान्यता दी जाएगी। इसके लिए फसल प्रविष्टि का कार्य 15 अगस्त से 31 अक्टूबर 2026 तक किया जाना है। किसानों को कृषि विभाग के एकीकृत किसान पोर्टल पर अलग से पंजीयन कराने की जरूरत नहीं होगी। एग्रीस्टैक में पंजीयन और आवश्यक भूमि संबंधी प्रक्रिया पूरी करना जरूरी होगा।

खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में पंजीकृत किसानों को आगामी वर्ष के लिए भी पंजीकृत माना जाएगा। जिन किसानों के पास एग्रीस्टैक फार्मर आईडी और किसान कोड उपलब्ध है, उन्हें नया पंजीयन कराने की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि पिछले पंजीयन के बाद यदि किसान ने खरीद-बिक्री, नामांतरण, बंटवारा, फौती या अन्य माध्यम से नई भूमि प्राप्त की है तो संबंधित भूमि या खसरा नंबर का संशोधन उपार्जन केंद्र अथवा समिति में जाकर कराया जा सकेगा।

जिन किसानों ने पिछले वर्ष पंजीयन नहीं कराया था और उनके पास किसान कोड नहीं है, उन्हें पहले एग्रीस्टैक में पंजीयन कराना होगा। इसके बाद संबंधित समिति या उपार्जन केंद्र में जाकर भूमि और खसरा, बैंक खाता तथा नॉमिनी से संबंधित विवरण दर्ज कराना होगा।

वन पट्टाधारी, डूबान, शासकीय पट्टेदार, कोटवार और संस्थागत श्रेणी के किसानों के लिए भी धान विक्रय हेतु एग्रीस्टैक में पंजीयन अनिवार्य है। अधिया, रेगहा, बटाईदार अथवा लीज पर भूमि लेकर धान बेचने वाले किसानों को एग्रीस्टैक पोर्टल के ऑथराइजेशन मॉड्यूल के माध्यम से अधिकृत किया जाएगा। नॉमिनी से संबंधित संशोधन की सुविधा 1 जुलाई से धान खरीद की अवधि तक समिति स्तर पर उपलब्ध रहेगी।

धान खरीद में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस वर्ष भी बायोमेट्रिक आधारित खरीद व्यवस्था लागू रहेगी। किसान स्वयं या उनके द्वारा नामांकित नॉमिनी खरीद केंद्र पर उपस्थित होकर समर्थन मूल्य पर धान बेच सकेंगे।

नॉमिनी के रूप में किसान के परिवार के नामित सदस्य और अन्य करीबी रिश्तेदार मान्य होंगे। प्रत्येक खरीदी केंद्र पर बायोमेट्रिक व्यवस्था के संचालन के लिए स्थायी खरीदी केंद्र प्रभारी नामांकित किए जाएंगे। संभावित एक्सेप्शन के मामलों के निराकरण के लिए कलेक्टर द्वारा ट्रस्टेड पर्सन की नियुक्ति भी की जाएगी।

कलेक्टर रेना जमील ने जिले के किसानों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना अपना पंजीयन और आवश्यक संशोधन समय रहते पूरा करा लें। उन्होंने किसानों से यह भी सुनिश्चित करने कहा है कि उनकी एग्रीस्टैक फार्मर आईडी बन चुकी हो और धान विक्रय के लिए संबंधित सभी खसरे उससे लिंक हों।

हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय