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दो बार बोआई के बाद भी नहीं बची धान फसल, 100 एकड़ खेत बना तालाब

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दो बार बोआई के बाद भी नहीं बची धान फसल, 100 एकड़ खेत बना तालाब


दो बार बोआई के बाद भी नहीं बची धान फसल, 100 एकड़ खेत बना तालाब


धमतरी, 28 जुलाई (हि.स.)। नगर पंचायत करेलीबड़ी के किसानों की दो बार की मेहनत लगातार बारिश और जलभराव से डूब गई। करीब 100 एकड़ में लगी धान फसल पूरी तरह पानी में डूब चुकी है और खेत तालाब में तब्दील हो गई है। इस सीजन में दो बार बोआई करने के बाद भी फसल नहीं बच पाई, इससे आक्रोशित किसान मंगलवार को खराब धान की फसल को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रभावित किसानों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर चारभाठा खार से नारी खार तक नाला की सफाई और चौड़ीकरण कर स्थायी समाधान की मांग की है।

कलेक्टर के नाम सौंपे ज्ञापन में पीड़ित किसान करण निषाद, भागवत निषाद, तेजराम साहू और हिम्मत साहू ने बताया कि लगातार बारिश के साथ गांव का निकासी पानी और खार का पानी चारभाठा नाला में पहुंचता है। नाला संकरा होने के कारण पानी की निकासी नहीं हो पाती और खेतों में कई दिनों तक पानी भरा रहता है। इस बार भी यही स्थिति बनी, जिससे लगभग 100 एकड़ में लगी धान की फसल पानी में डूब गई। खेतों में दूर-दूर तक केवल पानी दिखाई दे रहा है और खेती की जमीन तालाब जैसी नजर आ रही है।

किसानों ने बताया कि पहली बार बोआई के बाद फसल खराब होने पर उन्होंने दोबारा बीज खरीदा, खेत तैयार किया और फिर से धान की बोआई की। दूसरी बार भी लगातार बारिश और जलभराव ने पूरी फसल बर्बाद कर दी। बीज, मजदूरी और खेत की तैयारी में लगाया गया खर्च भी डूब गया। किसानों का कहना है कि अब उन्हें खेती के साथ परिवार के खर्च की भी चिंता सता रही है। किसानों के अनुसार यह समस्या हर वर्ष सामने आती है। चारभाठा खार से नारी तक नाला की चौड़ाई कम होने के कारण बारिश के दिनों में गांव का निकासी पानी और खार का पानी एक साथ नाला में पहुंचता है। पानी का बहाव रुकने से खेत जलमग्न हो जाते हैं और फसल को नुकसान होता है। इस संबंध में पहले भी कई बार प्रशासन को ज्ञापन दिया जा चुका है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं किया गया।

किसानों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर चारभाठा बाट से नारी बाट तक नाला की सफाई और चौड़ीकरण कराने की मांग की। उनका कहना है कि जब तक नाला की क्षमता नहीं बढ़ाई जाएगी, तब तक हर बारिश में खेतों में पानी भरता रहेगा और किसानों को इसी तरह नुकसान उठाना पड़ेगा। इस दौरान कन्हैया निषाद, अवध निषाद, चैतराम, ईश्वर, बलीराम, हृदय राम, कौशल, उमेश कुमार निषाद सहित अन्य प्रभावित किसान उपस्थित थे। किसान विनोद साहू ने बताया कि चारभाठा बाट से नारी बाट तक नाला संकरा होने से बारिश का पानी खेतों से निकल नहीं पाता। हर बारिश में खेत जलमग्न हो जाते हैं और धान की फसल डूब जाती है।

किसानों ने कहा नहीं बची फसल :

किसान दयालु साहू ने बताया कि पहली बोआई बारिश में खराब होने के बाद दोबारा बीज खरीदकर धान बोया, लेकिन दूसरी बार भी खेतों में पानी भरने से फसलें नष्ट हो गई। अब किसानों की पूरी मेहनत और खेती पर हुआ खर्च डूब गया है। किसान बसंत साहू ने बताया कि चारभाठा बाट से नारी बाट तक नाला की सफाई और चौड़ीकरण नहीं होने से हर बारिश में खेत जलमग्न हो जाते हैं। समय रहते स्थायी व्यवस्था नहीं की गई तो किसानों को हर साल इसी तरह फसल नुकसान झेलना पड़ेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा