कोरबा में उपमुख्यमंत्री अरुण साव को एनएसयूआई और युवा कांग्रेस ने दिखाए काले झंडे, कई कार्यकर्ता हिरासत में
कोरबा, 23 जुलाई (हि. स.)। दिल्ली में छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में गुरुवार को कोरबा में उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया, जब छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री अरुण साव के दौरे के दौरान युवा कांग्रेस और भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए एनएसयूआई प्रदेश महासचिव विशाल सिंह समेत कई पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव के कार्यक्रम को देखते हुए पुलिस प्रशासन पहले से ही अलर्ट मोड पर था। जैसे ही प्रदर्शनकारी काले झंडे लेकर विरोध जताने पहुंचे, पुलिस बल ने उन्हें रोकते हुए हिरासत में ले लिया। बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को देखते हुए मानिकपुर चौकी परिसर में अस्थायी जेल की व्यवस्था की गई, जहां सभी प्रदर्शनकारियों को रखा गया।
हिरासत में लिए गए प्रमुख नेताओं में एनएसयूआई के प्रदेश महासचिव विशाल सिंह के अलावा प्रतीक पांडे, भानु भगत, आशीष बंजारे, नवनीत सिंह, हर्ष डहरिया, अरविंद राठौर, मनोहर, आनंद चौहान और महेंद्र सिंह शामिल हैं। इनके अलावा युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भी प्रदर्शन में मौजूद रहे।
गिरफ्तारी के बाद युवा कांग्रेस और एनएसयूआई नेताओं ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। उनका कहना था कि काला झंडा दिखाना लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का माध्यम है और इसके जरिए वे दिल्ली में छात्रों पर हुए कथित पुलिस बल प्रयोग का विरोध कर रहे थे।
प्रदर्शनकारी नेताओं ने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ हुई कथित बर्बरता की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका कहना था कि सरकार को विरोध की आवाज दबाने के बजाय संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। सुरक्षा व्यवस्था के बीच उपमुख्यमंत्री का कार्यक्रम संपन्न कराया गया, जबकि प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर बाद में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई।
घटना के बाद कोरबा में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। विपक्षी संगठनों ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है, जबकि प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही है।
हिन्दुस्थान समाचार/ हरीश तिवारी
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी

