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जबर्रा में नाइट ट्रेकिंग और कैंपिंग से बढ़ेंगी पर्यटन की संभावनाएं

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जबर्रा में नाइट ट्रेकिंग और कैंपिंग से बढ़ेंगी पर्यटन की संभावनाएं


तीन राज्यों के 11 शहरों से पहुंचे 46 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा

धमतरी, 26 अक्टूबर (हि.स.)। प्राकृतिक सौंदर्य, घने जंगलों, जल संसाधनों और समृद्ध धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत से पहचाने जाने वाले धमतरी जिले में पर्यटन को नए आयाम देने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। गंगरेल में जल पर्यटन और कयाकिंग जैसी गतिविधियों के बाद अब वनग्राम जबर्रा में नाइट ट्रेकिंग एवं कैंपिंग के आयोजन से प्रकृति आधारित और साहसिक पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ावा मिला है।

यूथ हास्टल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (वाईएचएआई) की धमतरी इकाई ने 24 एवं 25 अक्टूबर को जबर्रा में दो दिवसीय नाइट ट्रेक एवं कैंपिंग का आयोजन किया। धमतरी विधायक ओंकार साहू ने सिहावा चौक से प्रतिभागियों के दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। आयोजन में तीन राज्यों के 11 शहरों से पहुंचे 46 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। दो दिवसीय गतिविधियों में डोंगरी ट्रेकिंग, बेस कैंप में कैंपफायर तथा नदी और घने जंगलों के बीच रात्रिकालीन ट्रेकिंग शामिल रही। इनमें 20 प्रतिभागियों ने नाइट ट्रेकिंग का अनुभव लिया। दूसरे दिन 15 किलोमीटर लंबा ट्रैक भी आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा। प्रतिभागियों ने वनांचल के प्राकृतिक वातावरण के बीच रोमांचक गतिविधियों में भाग लेते हुए आपसी सहयोग और टीम भावना का परिचय दिया। आयोजन में स्थानीय परंपराओं को भी स्थान दिया गया।

शरद पूर्णिमा की चांदनी रात में रात 12 बजे प्रतिभागियों ने पारंपरिक अमृत खीर का आनंद लिया। प्रतिभागियों ने स्वयं नाश्ता तैयार कर सामूहिक सहभागिता और आत्मनिर्भरता का संदेश भी दिया। इस दौरान सुरक्षित भव फाउंडेशन के डॉ. संदीप धूपड़ ने सड़क सुरक्षा एवं यातायात नियमों पर जागरूकता सत्र आयोजित किया। स्थानीय समिति के सहयोग से संपन्न हुए आयोजन में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि गंगरेल जलाशय में जल पर्यटन एवं कयाकिंग जैसी गतिविधियां पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं, वहीं जबर्रा का प्राकृतिक वातावरण कैंपिंग, ट्रेकिंग और नेचर ट्रेल के लिए उपयुक्त संभावनाएं प्रस्तुत करता है। ऐसी गतिविधियों से पर्यटकों को प्रकृति के समीप समय बिताने और स्थानीय परिवेश को समझने का अवसर मिलेगा। जिले में सिहावा क्षेत्र का श्रृंगी ऋषि आश्रम, महानदी का उद्गम क्षेत्र, कर्णेश्वर महादेव मंदिर, रुद्रेश्वर मंदिर और मां अंगारमोती मंदिर सहित अनेक धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थल भी पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।

इन स्थलों को बेहतर सुविधाओं, प्रामाणिक जानकारी और प्रभावी प्रचार-प्रसार से जोड़ने पर जिले में पर्यटन के विविध स्वरूपों को प्रोत्साहन मिल सकता है। पर्यटन गतिविधियों का विस्तार स्थानीय युवाओं और ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर भी विकसित कर सकता है। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय गाइड, कैंप प्रबंधन, भोजन व्यवस्था, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों से जुड़े व्यवसायों को लाभ मिलने की संभावना है। इसके लिए स्थानीय समुदाय की भागीदारी, आवश्यक प्रशिक्षण और बेहतर पर्यटक सुविधाओं के साथ पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता तथा जैव विविधता की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी होगा। जबर्रा में आयोजित नाइट ट्रेक एवं कैंपिंग जिले में प्रकृति आधारित पर्यटन की संभावनाओं को सामने लाने वाली पहल है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा