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नक्सलियाें ने बस्तर संभाग के 123 स्कूलों को बम-आगजनी से तबाह किया था, इनमें से 93 पुुन: खुले

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नक्सलियाें ने बस्तर संभाग के 123 स्कूलों को बम-आगजनी से तबाह किया था, इनमें से 93 पुुन: खुले


जगदलपुर, 09 अगस्त (हि.स.)। बस्तर संभाग में नक्सलवाद के खात्मे के साथ अब उन गांवों में शिक्षा की वापसी हो रही है, जहां कभी नक्सली स्कूलों को निशाना बनाकर बच्चों को पढ़ाई से दूर रखते थे। वर्ष 2005-06 में सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर में नक्सलियों ने 123 स्कूलों को बम से उड़ा दिया या आग के हवाले कर दिया था। इनमें 41 स्कूल 2024 में दोबारा शुरू किए गए, वर्ष 2026 में 52 और लंबे समय से बंद स्कूलों में पढ़ाई शुरू हो गई। अब शिक्षा विभाग ने इन्हीं इलाकों में 80 नए स्कूल खोलने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। मंजूरी मिलने पर इनका निर्माण वीवीजीरामजी योजना के तहत किया जाएगा।

जिन इलाकों में कभी स्कूल नक्सलियों का निशाना बने थे, वहीं अब प्रशासन शिक्षा का नेटवर्क पुन: मजबूत कर रही है। नक्सली संगठन ग्रामीणों को शिक्षा से दूर रखने के लिए गांवों में संचालित स्कूलों को निशाना बनाते थे। उनकी रणनीति सरकारी व्यवस्था को कमजोर करना था। ग्रामीणों को अपने प्रभाव क्षेत्र में बनाए रखना था। नक्सलवाद से ग्रस्त इलाकाें के स्कूलों में पढ़ाई बंद होने से बच्चों की शिक्षा प्रभावित हुई ।

नक्सलियों ने सरकारी स्कूलों को केवल पढ़ाई की जगह नहीं माना। वे इन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार की मौजूदगी के प्रतीक के रूप में देखते थे। स्कूलों में शिक्षक पहुंचते थे। सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचती थी। प्रशासनिक गतिविधियां पहुंचती थीं। इसलिए इन्हें निशाना बनाकर वे ग्रामीणों को सरकारी व्यवस्था से अलग रखना चाहते थे। स्कूल बंद होने का सबसे बड़ा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा। गांव में स्कूल नहीं होने से छोटे बच्चों को दूर के स्कूलों तक जाना पड़ता था। नक्सल प्रभावित इलाकों में आवागमन और सुरक्षा की समस्या के कारण हजारों बच्चे दो दशक तक पढ़ाई से दूर होते गए। परिजनों ने बच्चों को छात्रावासों में भेजना शुरू किया, लेकिन यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी। इससे बच्चों और माता-पिता के बीच दूरी बढ़ी।

शिक्षा विभाग के जेडी एचआर सोम ने रविवार काे बताया कि बस्तर संभााग के बीजापुर में 35, सुकमा में 19, नारायणपुर में 25 एवं दंतेवाड़ा में 01 बंद पड़े स्कूलों का दोबारा खुलना नक्सल प्रभावित गांवों में बदलते माहौल का संकेत है। दो दशक पहले स्कूल भवनों को निशाना बनाकर नक्सलियों ने शिक्षा व्यवस्था को कमजोर किया था। स्कूल बंद हुए, बच्चों की पढ़ाई बाधित हुई, कई परिवारों ने उन्हें छात्रावासों में भेजा। अब सुरक्षा स्थिति बेहतर होने के बाद उसी क्षेत्र में स्कूलों की वापसी हो रही है। 2024 में 41 स्कूल खुले, जिसमें 532 बच्चों ने दाखिला लिया। 2026 में 52 और बंद स्कूलों को शुरू किया गया। यहां करीब 1 हजार से अधिक बच्चों ने प्रवेश लिया है। हाल ही में सुकमा जिले के ग्रामीण इलाकों में कलेक्टर के दौरे के दौरान ग्रामीणों ने स्कूल की मांग की थी। अब 80 नए स्कूलों का प्रस्ताव बताता है कि ग्रामीण शिक्षा के प्रति जागरूक हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे