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दुगली की पुरानी बस्ती में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया नवा खाई पर्व

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दुगली की पुरानी बस्ती में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया नवा खाई पर्व


-बुढ़ादेव-बुढ़ी माई को अर्पित की नई फसल, सुख-समृद्धि और अच्छी पैदावार की कामना

धमतरी, 20 अक्टूबर (हि.स.)। धमतरी जिले के दुगली की पुरानी बस्ती में दशमी तिथि के अवसर पर मंगलवार काे पारंपरिक नवा खाई पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर ग्रामीणों ने अपनी प्राचीन परंपराओं और रीति-रिवाजों का निर्वहन करते हुए बुढ़ादेव-बुढ़ी माई को धान की नई फसल अर्पित की तथा परिवार और गांव की सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं अच्छी पैदावार की कामना की।

नवा खाई पर्व आदिवासी समाज की आस्था, संस्कृति और कृषि परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण त्योहार है। नई फसल के आगमन पर प्रकृति और आराध्य देवी-देवताओं के प्रति आभार व्यक्त करने की परंपरा इस पर्व की विशेष पहचान है। दुगली की पुरानी बस्ती में भी ग्रामीणों ने पारंपरिक विधि-विधान के साथ पर्व मनाकर अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का संदेश दिया। पर्व के दौरान नई फसल से तैयार पारंपरिक पकवान और प्रसाद का विशेष महत्व रहा। इष्ट देवी-देवताओं को नई फसल अर्पित करने के बाद ग्रामीणों ने खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया। इस दौरान सजा-कोरिया के पत्तों में प्रसाद ग्रहण करने की परंपरा भी निभाई गई, जो स्थानीय लोक संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली की विशिष्ट पहचान है।

नवा खाई पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का प्रतीक भी है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को पूर्वजों की परंपराओं, मान्यताओं और रीति-रिवाजों से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खेती-किसानी पर आधारित ग्रामीण जीवन में नई फसल के स्वागत से जुड़े इस पर्व का विशेष महत्व है। आयोजन में ग्राम पटेल सीताराम नेताम, शंभूराम मरकाम, गायता गुलेश नेताम, सिरहा बिरबल नेताम, सुकलू राम मरई, संतराम नेताम, राजाराम नेताम, अरुण यादव, दशोदिया बाई नेताम, कचरी बाई नेताम, सगनूराम नेताम, शिवा नेताम, वरुण देव नेताम सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा