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नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना में धमतरी अव्वल, लक्ष्य से चार गुना ज्यादा उपलब्धि

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नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना में धमतरी अव्वल, लक्ष्य से चार गुना ज्यादा उपलब्धि


धमतरी, 18 अप्रैल (हि.स.)। श्रमिक परिवारों के बच्चों को शिक्षा के जरिए सशक्त बनाने की दिशा में धमतरी जिले ने राज्य स्तर पर नई मिसाल कायम की है। छत्तीसगढ़ शासन के श्रम विभाग अंतर्गत संचालित छत्तीसगढ़ भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल की नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना में जिले ने पूरे राज्य में प्रथम स्थान हासिल किया है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले को 12 हजार छात्रों को लाभान्वित करने का लक्ष्य मिला था, लेकिन धमतरी ने 53,766 छात्रों को छात्रवृत्ति देकर लक्ष्य से चार गुना अधिक प्रदर्शन किया। इस दौरान 10.37 करोड़ रुपये की राशि सीधे छात्रों के खातों में अंतरित की गई, जो पारदर्शी और प्रभावी प्रशासन का उदाहरण बनकर सामने आई है। इस योजना के तहत कक्षा 1 से लेकर स्नातकोत्तर एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों तक अध्ययनरत श्रमिक परिवारों के बच्चों को आर्थिक सहायता दी जाती है, ताकि आर्थिक तंगी उनकी पढ़ाई में बाधा न बने। नगर निगम क्षेत्र की छात्रा प्रिती यादव, जो एमए अंतिम वर्ष में अध्ययनरत हैं, को छह हजार रुपये की छात्रवृत्ति मिली। वहीं कुरूद विकासखंड के ग्राम चटौद की खिलेश्वरी, बीए अंतिम वर्ष की छात्रा, को 4 हजार रुपये की सहायता दी गई। दोनों छात्राएं निर्माण श्रमिक परिवारों से हैं और उनकी उपलब्धि इस योजना की जमीनी सफलता को दर्शाती है।

श्रम पदाधिकारी एन. के. साहू के अनुसार, कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के निर्देशन में जिले में विशेष अभियान चलाकर श्रमिक परिवारों तक योजना की जानकारी पहुंचाई गई। मैदानी अमले की सक्रियता के चलते रिकॉर्ड संख्या में आवेदन प्राप्त हुए और उनका त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया गया। जिले में लाभान्वित छात्रों को आगे उच्च शिक्षा से जोड़ने के लिए भी कार्ययोजना तैयार की जा रही है। यह पहल श्रमिक परिवारों के बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

श्रम विभाग ने स्पष्ट किया है कि निःशुल्क पंजीयन के माध्यम से निर्माण श्रमिक मंडल से जुड़कर विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाया जा सकता है। धमतरी की यह उपलब्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हजारों परिवारों के सपनों को नई दिशा देने की प्रेरक कहानी है—जहां सही योजना, प्रभावी क्रियान्वयन और प्रशासनिक प्रतिबद्धता ने विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा