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श्रम से संवरा नाला, खेतों में आई हरियाली; सिंचाई से बदली गांव की तस्वीर

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श्रम से संवरा नाला, खेतों में आई हरियाली; सिंचाई से बदली गांव की तस्वीर


सूरजपुर, 27 अगस्त (हि.स.)। कभी जिस नाले का पानी खेतों तक पहुंचने से पहले ही रास्ते में रुक जाता था, आज उसी नाले से खेतों तक पहुंच रहा पानी किसानों के लिए खुशहाली की नई उम्मीद लेकर आया है। भैयाथान क्षेत्र में बारिश से पहले कराए गए नाला सफाई कार्य से जल प्रवाह बेहतर हुआ और किसानों को धान की रोपाई के लिए सिंचाई का सहारा मिला। आज गुरुवार को खेतों में दिखाई दे रही हरियाली ग्रामीणों के श्रम और जल संरक्षण के इस प्रयास का परिणाम नजर आ रही है।

सूरजपुर जिले के भैयाथान विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत भैयाथान में कलेक्टर रेना जमील के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत सीईओ विजेन्द्र सिंह पाटले के निर्देशन में विकसित भारत जी राम जी योजना के तहत बारिश से पहले बड़े पैमाने पर नाला सफाई का कार्य कराया गया। नाला साफ होने के बाद बारिश का पानी सुगमता से आगे बढ़ा और खेतों तक पहुंचा। किसानों ने इसी पानी का उपयोग धान की रोपाई में किया।

पहले झाड़ियों और टूट-फूट के कारण नाले का जल प्रवाह कई स्थानों पर बाधित होता था। इससे बारिश का पानी खेतों तक पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाता था। इस वर्ष नाले की सफाई के बाद पानी का रास्ता साफ हुआ, जिससे खेतों तक पानी पहुंचने लगा और किसानों के लिए खेती का काम आसान हुआ।

भैयाथान क्षेत्र के किसान संलित कुशवाहा, उमाशंकर, कृष्णा नाविक, संदीप, धनीराम, राकेश, रूप नारायण, मोतीलाल, जय राम, राम नारायण और विजेन्द्र सहित अन्य किसानों ने नाले के पानी का उपयोग धान की रोपाई में किया है। इससे किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त परेशानी कम हुई है।

रोजगार के साथ जल संरक्षण का आधार

विकसित भारत जी राम जी योजना के तहत कराया गया यह कार्य ग्रामीणों के लिए रोजगार उपलब्ध कराने के साथ जल संरक्षण और सिंचाई का आधार भी तैयार कर रहा है। नाले की सफाई से जहां ग्रामीणों को काम मिला, वहीं इसका सीधा लाभ किसानों को खेतों तक पानी पहुंचने के रूप में मिला है। खेतों में लहलहाती धान की फसल इस पहल के परिणाम को सामने ला रही है।

रबी फसलों के लिए भी मिलेगी सिंचाई की उम्मीद

इस पहल का लाभ केवल खरीफ सीजन तक सीमित रहने की उम्मीद नहीं है। नाले में संचित पानी और बेहतर जल प्रवाह से किसानों को रबी फसलों के दौरान भी सिंचाई का लाभ मिलने की संभावना है। इससे एक ही खेत से दो फसल लेने का आधार मजबूत होगा।

किसान नाले के पानी का उपयोग गेहूं, सरसों, साग-सब्जी सहित विभिन्न रबी फसलों के उत्पादन में कर सकेंगे। इससे खेती का रकबा बढ़ाए बिना ही उत्पादन और किसानों की आय में बढ़ोतरी की संभावना बनेगी। रोजगार के साथ जल संरक्षण और सिंचाई को जोड़ने वाली यह पहल गांव की कृषि व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय