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1923 से जिले में सिंचाई परियोजनाओं को फलीभूत कर रहा मुरूमसिल्ली बांध

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1923 से जिले में सिंचाई परियोजनाओं को फलीभूत कर रहा मुरूमसिल्ली बांध


गंगरेल जलाशय का सहायक बांध है मुरूमसिल्ली बांध

मुरूमसिल्ली बांध पूरी तरह सुरक्षित, अफवाहों पर ध्यान न दें: जल संसाधन विभाग

धमतरी, 01 जुलाई (हि.स.)। जल संसाधन विभाग ने स्पष्ट किया है कि मुरूमसिल्ली बांध पूरी तरह सुरक्षित है और उसमें किसी भी प्रकार की दरार या संरचनात्मक क्षति नहीं पाई गई है। विभाग द्वारा बांध की सुरक्षा, संरचनात्मक मजबूती और जल प्रबंधन को लेकर नियमित निगरानी एवं तकनीकी परीक्षण किए जा रहे हैं। इसी क्रम में 23 जून को मुख्य अभियंता मैक्सी कुजूर ने अधीक्षण अभियंता केके मित्तल, कार्यपालन अभियंता हेमलाल कुरेशिया, कार्यपालन अभियंता आरएस नेताम तथा अनुविभागीय अधिकारी भविन देवांगन के साथ बांध का विस्तृत निरीक्षण किया।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 1923 में निर्मित मुरूमसिल्ली बांध प्रदेश की प्रमुख वृहद सिंचाई परियोजनाओं में शामिल है और गंगरेल जलाशय का सहायक बांध होने के कारण इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए समय-समय पर मुख्य अभियंता स्तर से तकनीकी निरीक्षण किया जाता है। निरीक्षण के दौरान बांध की संरचनात्मक स्थिति, तटबंधों की सुरक्षा, जल निकासी व्यवस्था और अन्य तकनीकी पहलुओं का गहन परीक्षण किया गया। उस समय मुरूमसिल्ली बांध में 130.07 एमसीएम (4.59 टीएमसी) यानी 80.29 प्रतिशत तथा गंगरेल जलाशय में 325.95 एमसीएम (11.509 टीएमसी) यानी 42.50 प्रतिशत जल संग्रहण दर्ज किया गया।

जल प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए मुरूमसिल्ली बांध से नियंत्रित रूप से गंगरेल जलाशय में पानी छोड़ने के निर्देश दिए गए, ताकि भविष्य में अल्प वर्षा या सूखे की स्थिति में सिंचाई, पेयजल और अन्य आवश्यक जरूरतों के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध रह सके। निरीक्षण के दौरान वर्षा पूर्व तटबंधों पर संभावित मिट्टी क्षरण की मरम्मत एवं संरक्षण कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश भी दिए गए, जिनके अनुरूप आवश्यक कार्य युद्धस्तर पर जारी है।

जल संसाधन विभाग ने बुधवार काे विज्ञप्ति जारी कर नागरिकों से इंटरनेट मीडिया अथवा अन्य माध्यमों से प्रसारित भ्रामक और तथ्यहीन खबरों पर विश्वास नहीं करने तथा केवल अधिकृत स्रोतों से जारी जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। विभाग ने बताया कि वर्षा पूर्व किए जा रहे सभी मरम्मत एवं संरक्षण कार्य बांध की दीर्घकालीन सुरक्षा, कार्यक्षमता और जनहित सुनिश्चित करने की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा