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किराया नहीं पटाने पर नगर निगम ने दुकान सील की, बकायादारों पर कार्रवाई तेज

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किराया नहीं पटाने पर नगर निगम ने दुकान सील की, बकायादारों पर कार्रवाई तेज


किराया नहीं पटाने पर नगर निगम ने दुकान सील की, बकायादारों पर कार्रवाई तेज


धमतरी, 12 अक्टूबर (हि.स.)। नगर निगम ने बकाया कर और दुकान किराया वसूली को लेकर सख्ती शुरू कर दी है। बार-बार सूचना देने और पर्याप्त समय दिए जाने के बाद भी बकाया राशि जमा नहीं करने वाले करदाताओं के खिलाफ निगम की टीम ने कार्रवाई शुरू कर दी है। इसी क्रम में सोमवार को नया बस स्टैंड स्थित दुकान क्रमांक-दो को विधिवत पंचनामा तैयार करने के बाद सील कर दिया गया।

निगम प्रशासन द्वारा कई बार सूचना दिए जाने के बाद भी कई बकायादारों ने राशि जमा नहीं की है। ऐसे करदाताओं की पहले से सूची तैयार की गई थी। अब बड़े टैक्स, दुकान किराया और जलकर के बकायादारों से वसूली के लिए चरणबद्ध अभियान चलाया जा रहा है। कार्रवाई के दौरान स्वामी विवेकानंद वार्ड के करदाता कबीर मंगलम मैरिज ग्राउंड को बकाया राशि जमा करने के लिए एक दिन का समय दिया गया है।

निगम ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय में राशि जमा नहीं करने पर संबंधित बकायादारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। नया बस स्टैंड की दुकान सील करने के बाद अन्य बकायादार दुकानों पर भी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। निगम की टीम प्रतिदिन बकाया वसूली के लिए अभियान चलाएगी। इस कार्रवाई में नितिन बनवासी, सत्यम मूर्ति, मोहम्मद शेरखान, संजय गुप्ता, पुरुषोत्तम प्रजापति, समर रणसिंह, पवन देवांगन, इशाक खान, छबि प्रजापति, आलोक तिवारी, श्यामू सोना, अमित सोना, निलेश और बंसी दीप सहित निगम की टीम के सदस्य शामिल रहे।

नगर निगम आयुक्त अरुण कुमार वर्मा ने बकायादारों से अपील की है कि वे अपने बकाया दुकान किराये और करों की राशि समय पर जमा करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि निगम की वसूली कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी तथा बकाया राशि जमा नहीं करने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कदम उठाए जाएंगे। निगम प्रशासन का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य बकाया राजस्व की वसूली सुनिश्चित करना और करदाताओं को समय पर भुगतान के प्रति जागरूक करना है।

जानकारी के अनुसार नगर निगम को संपत्ति कर, दुकान किराया, जलकर के रूप में लाखों रुपये वसूल करने हैं। शहर के कई नागरिक नगर निगम से सुविधा लेने के लिए नल कनेक्शन और दुकान किराए पर तो ले लेते हैं, लेकिन नियमित इसका शुल्क नहीं पटाते।इसके चलते शुल्क बढ़ते बढ़ते पहले सैकड़ों फिर हजारों और बाद में लाखों तक पहुंच जाता है। नगर निगम क्षेत्र में सैकड़ों लोग हैं जिनका राजस्व बकाया है। बार-बार निगम द्वारा नोटिस दिए जाने के बाद भी कुछ असर नहीं होता। तालाबंदी और जब्ती की कार्रवाई अपनाने के बाद लोग शुल्क पटाने पहुंचते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा