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महापौर दलपत सागर के उन्नयन के लिए स्वीकृत 9.88 करोड़ का हिसाब सार्वजनिक करे : राजेश चौधरी

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महापौर दलपत सागर के उन्नयन के लिए स्वीकृत 9.88 करोड़ का हिसाब सार्वजनिक करे : राजेश चौधरी


जगदलपुर, 06 सितंबर (हि.स.)। नगर निगम जगदलपुर के नेता प्रतिपक्ष राजेश चौधरी ने रविवार काे जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दलपत सागर के उन्नयन एवं सफाई के नाम पर स्वीकृत एवं प्राप्त 9.88 करोड़ की राशि के उपयोग को लेकर महापौर से सार्वजनिक रूप से पूरा हिसाब देने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि शहर की जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि दलपत सागर के उन्नयन के लिए स्वीकृत राशि में से अब तक कितनी राशि प्राप्त हुई, कितनी राशि खर्च की गई, किन कार्यों में खर्च की गई और वर्तमान में कितनी राशि शेष है। राजेश चौधरी ने कहा कि उन्हें जानकारी मिल रही है कि एनएमडीसी से लगभग 50 लाख की स्वीकृति पुनः प्राप्त हो रही है, जिसमें प्रथम किस्त के रूप में 20 लाख की स्वीकृति की बात सामने आ रही है। यदि यह राशि स्वीकृत हुई है तो इसकी आधिकारिक जानकारी के साथ यह भी बताया जाना चाहिए कि राशि प्राप्त होने के बाद इसे किन कार्यों में खर्च किया जाएगा।

उन्हाेने कहा कि जगदलपुर विधायक एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव द्वारा शहर की जनता को बताया गया था, कि दलपत सागर के उन्नयन के लिए ₹9.88 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है। इसके बाद महापौर द्वारा विधायक, नगरीय प्रशासन मंत्री, सांसद एवं भाजपा सरकार का धन्यवाद भी समाचार पत्रों के माध्यम से किया गया था। लेकिन इस स्वीकृति को लगभग सवा वर्ष बीतने के बाद भी शहर की जनता को यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है कि उक्त राशि का वास्तविक रूप से कितना उपयोग हुआ है और किन-किन कार्यों पर खर्च किया गया है। केवल राशि स्वीकृत होने की जानकारी समाचार पत्रों और मीडिया के माध्यम से देने से जनता की जवाबदेही पूरी नहीं होती। जनता यह जानना चाहती है कि स्वीकृत राशि में से नगर निगम को वास्तव में कितनी राशि प्राप्त हुई और उसका उपयोग किस मद में किया गया।

नेता प्रतिपक्ष राजेश चौधरी ने दलपत सागर में चलाए गए सफाई अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि महापौर द्वारा सार्वजनिक रूप से कहा गया था कि इस अभियान में नगर निगम का कोई खर्च नहीं हो रहा है और संबंधित संस्था द्वारा डेमो के तौर पर कार्य किया जा रहा है। यदि नगर निगम का कोई खर्च नहीं हुआ, तो सफाई अभियान के दौरान चलने वाले वाहनों में डीजल की व्यवस्था किसके द्वारा की गई, वार्डों से लगाए गए नगर निगम के कर्मचारियों का भुगतान किस मद से किया गया और अभियान में अन्य व्यवस्थाओं पर हुए खर्च का भुगतान किस संस्था ने किया इसकी जानकारी भी जनता के सामने रखी जानी चाहिए। नगर निगम के कर्मचारियों को सफाई अभियान में लगाया गया और उनके एक महीने के भुगतान की जिम्मेदारी भी नगर निगम द्वारा उठाई गई है। ऐसे में यह कहना कि नगर निगम का कोई खर्च नहीं हुआ, अपने आप में सवाल खड़ा करता है। महापौर को इस पूरे मामले में पारदर्शिता के साथ आय-व्यय का पूरा विवरण सार्वजनिक करना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे