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बाहुडा गोंचा पूजा विधान केे साथ 24 जुलाई काे श्रीमंदिर लौटेंगे भगवान श्रीजगन्नाथ स्वामी

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बाहुडा गोंचा पूजा विधान केे साथ 24 जुलाई काे श्रीमंदिर लौटेंगे भगवान श्रीजगन्नाथ स्वामी


-बाहुडा गोंचा पूजा विधान केे साथ 24 जुलाई काे श्रीमंदिर लौटेंगे भगवान श्रीजगन्नाथ स्वामी

जगदलपुर, 23 जुलाई (हि.स.)। बस्तर गोंचा महापर्व परायण की ओर अग्रसर है, जिसके तहत 24 जुलाई को को बाहुडा गोंचा रथयात्रा पूजा विधान के साथ ही भगवान श्रीजगन्नाथ स्वामी रथारूढ़ होकर गुडि़चा मंदिर-सिरहासार भवन से श्रीमंदिर लौटेंगे, श्रीमंदिर में भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा व बलभद्र स्वामी के विग्रहों के पूजा विधान की परंपरानुसार नजर उतारा जावेगा, ततपश्चात कपाट फेड़ा पूजा विधान में लक्ष्मी-नारायण संवाद के बाद भगवान श्रीजगन्नाथ स्वामी श्रीमंदिर के गर्भ गृह में आगामी गोंचा पर्व तक के लिए स्थापित होंगे, जिसका श्रृद्धालु दर्शन पुण्य-लाभ प्राप्त करेंगे।

बस्तर गोंचा की सबसे अनूठी पहचान तुपकी चलाकर भगवान जगन्नाथ स्वामी को सलामी देने की परंपरा का श्रृद्धालू बाहुडा गोंचा रथयात्रा के दौरान भी निर्वहन करेंगे।

इससे पूर्व बस्तर गोंचा पर्व के नियत कार्यक्रम के अनुसार 16 जुलाई को श्रीगोंचा रथयात्रा पूजा विधान के साथ भगवान श्रीजगन्नाथ, माता सुभद्रा व बलभद्र स्वामी के विग्रहों को रथारूढ़ कर रथयात्रा के संपन्नता के साथ गुडि़चा मंदिर-सिरहासार भवन में रियासत कालीन परंपरानुसार स्थापित किया गया, जहां भगवान श्रीजगन्नाथ, माता सुभद्रा व बलभद्र स्वामी के दर्शन करने के लिए पिछले सप्ताह भर से श्रद्धालु गुडि़चा मंदिर-सिरहासार भवन पहुंच रहे हैं। लगातार हो रही बारिश के बीच आज गरूवार को भी श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ स्वामी के दर्शन-पूजन करने के लिए पहुंचते रहे। वहीं बस्तर गोंचा महापर्व के अंतिम पड़ाव में करीतगांव क्षेत्र के 16 गांव के श्रद्धालुओं ने 23जुलाई को रियासत कालीन शताब्दियों पुरानी परंपरानुसार आखिरी अमनिया भोग का अर्पण भगवान श्रीजगन्नाथ, माता सुभद्रा व बलभद्र स्वामी को किया गया।

360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के पूर्व अध्यक्ष ईश्वर खंबारी ने बताया कि बस्तर गोंचा महापर्व परायण की ओर अग्रसर है, जिसके तहत 24 जुलाई को बाहुडा गोंचा रथयात्रा पूजा विधान के साथ ही भगवान श्रीजगन्नाथ स्वामी श्रीमंदिर लौटेंगे, जहां कपाट फेड़ा पूजा विधान लक्ष्मी-नारायण संवाद के बाद भगवान श्रीजगन्नाथ स्वामी श्रीमंदिर के गर्भ गृह में आगामी गोंचा पर्व तक के लिए स्थापित होंगे। 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी पूजा विधान के बाद देवउठनी एकादशी तक समस्त वैवाहिक आयोजनों पर विराम लग जायेगा। इसके साथ ही बस्तर गोंचा पर्व का परायण आगामी वर्ष के लिए हो जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे