श्रीगोंचा पूजा विधान में रथारूड़ भगवान श्रीजगन्नाथ पंहुचे सिरहासार-जनकपुरी गुंडिचा मंदिर
जगदलपुर, 16 जुलाई (हि.स.)। रियासत कालीन ऐतिहासिक बस्तर गोंचा महापर्व में श्रीगोंचा पूजा विधान में 360 घर आरण्यक ब्राहम्ण समाज के पदेन पाढी एवं पानीग्राही के मार्गदर्शन में बस्तर राजपरिवार के सदस्य
कमलचंद भंजदेव के द्वारा छेरा-बाहरा रस्म के साथ ही तीन रथों में भगवान
श्रीजगन्नाथ, सुभद्रा
व बलभद्र स्वामी के 22 विग्रहों
को रथारूड़ किया गया । श्रद्धालुओं के द्वारा हरी बोलो एवं श्रीजगन्नाथ के जय
घोष के साथ रथ परिक्रमा आज गुरूवार को संपन्न किया गया।
श्रद्धा उत्साह और भक्ति भाव के साथ श्रृद्धालुओं ने रथ
खिंचते हुए जनकपुरी गुडिचा मंदिर-सिरहासार भवन में भगवान श्रीजगन्नाथ स्वामी सुभद्रा व
बलभद्र स्वामी गुडिचा मंदिर में नौ दिन के लिए स्थपित किया गया।
360 घर आरण्यक ब्राहम्ण समाज के
पूर्व अध्यक्ष दिनेश पानीग्राही ने बताया कि छेरा-बाहरा रस्म को पूरा करने के लिए जिस झाड़ू
का उपयोग किया जाता है, वह चांदी से बनी हुई है, जिसमें पवित्र कुश लगे हुए हैं। इस झाड़ू का उपयोग केवल बस्तर गोंचा पर्व के रथ यात्रा के दौरान ही किया जाता है । इस झाड़ू में हर साल नया पवित्र कुश लगाया जाता है।
दिनेश पानीग्राही ने बताया कि बस्तर गोंचा पर्व में भगवान श्रीजगन्नाथ स्वामी के सम्मान में तुपकी चलाने की
अनोखी परंपरा बस्तर गोंचा पर्व को सबसे अलग स्थान दिलाता है। बस्तर गोंचा पर्व
के लिए नानगूर क्षेत्र के ग्रामीण तुपकी बनाकर लाए थे, भगवान जगन्नाथ स्वामी के
सम्मान में बस्तर के जन समुदाय द्वारा गार्ड आफ आनर के तौर पर पिछले 619 वर्ष पूर्व शुरू हुई रियासत कालीन परंपरा आज भी जारी है । गोंचा पर्व में शामिल होने
पहुंचे लोगों ने जमकर तुपकी चलाया ।
उन्होंने बताया कि भगवान जगन्नाथ के रथारूढ़
होने पर तुपकी चलाने की अनूठी परंपरा बस्तर गोंचा पर्व का मुख्य आकर्षण है। तुपकी चलाने की
परंपरा बस्तर को छोड़कर पूरे विश्व में अन्यत्र कहीं भी नहीं होती है। दीवाली के पटाखे की तरह
तुपकी की गोलियों से सारा शहर गूंज उठता है । यह बंदूक रूपी तुपकी विशेष पोले बांस की नली से बनायी
जाती है, जिसे बस्तर के ग्रामीण तैयार करते हैं । इस तुपकी को तैयार करने के
लिए, ग्रामीण गोंचा पर्व के पहले ही जुट जाते हैं, तथा तरह-तरह के डिजाईन में आकर्षक तुपकियों का निर्माण अपनी कल्पना शक्ति के
आधार पर करते हैं।
उन्हाेने बताया कि बस्तर गोंचा महापर्व में तीन
रथों में भगवान श्रीजगन्नाथ स्वामी, सुभद्रा व बलभद्र स्वामी के 22 विग्रहों को रथारूड़ कर
श्रीगोंचा पूजा विधान में भगवान श्रीजगन्नाथ स्वामी को परम्परानुसार गजामुंग और
फनस खोसा का भोग लगाकर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया । बस्तर गोंचा महापर्व में तीन
रथों में भगवान श्रीजगन्नाथ स्वामी, सुभद्रा व बलभद्र स्वामी के 22 विग्रहों को रथारूड़ करने की परंपरा भी बस्तर को छोड़कर पूरे विश्व
में अन्यत्र कहीं भी नहीं होती है।
हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे

