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सूरजपुर : आदिवासी कन्या परिसर में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित

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सूरजपुर : आदिवासी कन्या परिसर में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित


सूरजपुर, 09 अगस्त (हि.स.)। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आदिवासी आवासीय कन्या परिसर विद्यालय, चम्पकनगर में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। आज रविवार को आयोजित शिविर में छात्राओं, अभिभावकों और अन्य उपस्थित लोगों को उनके कानूनी अधिकारों तथा विभिन्न कानूनों की जानकारी सरल भाषा में दी गई।

कार्यक्रम प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण थॉमस एक्का के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश, फास्ट ट्रैक कोर्ट आनंद प्रकाश वारियाल मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। उन्होंने विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए आदिवासी समुदायों के अधिकारों और उनके योगदान के बारे में जानकारी दी।

न्यायाधीश ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 23 दिसंबर 1994 को प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद प्रत्येक वर्ष 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य आदिवासी समुदायों के योगदान को सम्मानित करने के साथ उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

शिविर में पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया गया कि यह कानून बच्चों को लैंगिक अपराधों से संरक्षण प्रदान करता है और बालक-बालिका दोनों पर समान रूप से लागू होता है। छात्राओं को किसी भी अनुचित घटना की स्थिति में विश्वसनीय व्यक्ति या संबंधित प्राधिकरण को तत्काल जानकारी देने के लिए प्रेरित किया गया।

किशोर न्याय अधिनियम की जानकारी देते हुए बताया गया कि 16 से 18 वर्ष आयु के किशोर द्वारा जघन्य अपराध किए जाने के मामलों में कानून के तहत विशेष प्रक्रिया का प्रावधान है।

मध्यस्थता और लोक अदालत की जानकारी

कार्यक्रम में मध्यस्थता 3.0 अभियान और लोक अदालत के बारे में भी जानकारी दी गई। बताया गया कि मध्यस्थता और लोक अदालत के माध्यम से विवादों का आपसी सहमति और सौहार्दपूर्ण तरीके से समाधान किया जा सकता है। इससे समय और धन दोनों की बचत होती है। छात्राओं से इस जानकारी को अपने परिवार के सदस्यों तक पहुंचाने की अपील की गई।

यातायात नियमों और बाल विवाह पर जागरूक किया

शिविर में मोटर व्हीकल एक्ट के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी देते हुए वाहन चलाते समय यातायात नियमों का पालन करने, वाहन का बीमा कराने और वैध ड्राइविंग लाइसेंस रखने के महत्व को समझाया गया। इसके साथ ही बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम और बाल विवाह के दुष्परिणामों की जानकारी भी दी गई।

उपस्थित लोगों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से उपलब्ध निःशुल्क कानूनी सहायता के बारे में भी बताया गया। छात्राओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए कैरियर गाइडेंस पर चर्चा की गई और उन्हें शिक्षा के साथ अपने लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम में छात्रावास अधीक्षिका मंजू एक्का, पीएलवी सत्य नारायण, उमेश कुमार राजवाड़े सहित बड़ी संख्या में छात्राएं और अभिभावक उपस्थित रहे। शिविर का उद्देश्य आदिवासी समुदाय के बच्चों और उनके परिवारों को कानूनी अधिकारों, संरक्षणात्मक कानूनों और निशुल्क विधिक सहायता के प्रति जागरूक कर उन्हें कानून के प्रति सजग और सशक्त बनाना रहा।

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हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय