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कोरबा : विद्यार्थियों को ऑनलाइन फ्रॉड और डिजिटल ठगी से बचाव की दी जानकारी

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कोरबा : विद्यार्थियों को ऑनलाइन फ्रॉड और डिजिटल ठगी से बचाव की दी जानकारी


कोरबा : विद्यार्थियों को ऑनलाइन फ्रॉड और डिजिटल ठगी से बचाव की दी जानकारी


कोरबा, 22 अगस्त (हि.स.)। बढ़ते साइबर अपराध, ऑनलाइन ठगी और डिजिटल धोखाधड़ी के प्रति विद्यार्थियों एवं आम नागरिकों को जागरूक करने के उद्देश्य से आज शनिवार को एमएलसी आईटी एंड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट में साइबर सिक्योरिटी अवेयरनेस प्रोग्राम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन एमएलसी आईटी एंड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट, कोरबा साइबर सेल एवं बजाज फाइनेंस के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने के महत्वपूर्ण उपायों की जानकारी दी।

कार्यक्रम में साइबर पुलिस विशेषज्ञ अजय सोनवानी, साइबर एक्सपर्ट वीरकेश्वर, फील्ड एक्सपर्ट श्याम सिदार, बजाज फाइनेंस के रीजनल मैनेजर पंकज गायकवाड़, एमएलसी के डायरेक्टर एकेडमिक बीके शर्मा तथा डायरेक्टर एकेडमिक साधना शर्मा सहित अन्य अतिथि एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों का स्वागत एवं परिचय कराया गया।

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने साइबर सिक्याेरिटी, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन फ्राॅड, फिसिंग, ऑनलाइन स्कैम्स और परसनल डाटा प्राेटेक्शन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी।

विशेषज्ञों ने वास्तविक जीवन में सामने आने वाले साइबर फ्रॉड के विभिन्न तरीकों को उदाहरणों के माध्यम से समझाया और बताया कि थोड़ी सी सतर्कता बरतकर लोग बड़े आर्थिक नुकसान से बच सकते हैं।

विद्यार्थियों को बताया गया कि अपने सभी महत्वपूर्ण ऑनलाइन अकाउंट के लिए मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड रखना चाहिए। जहां संभव हो, टू फैक्टर अथेंटिकेशन यानी 2एफए को सक्रिय करना चाहिए। किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, पिन, सीवीवी, पासवर्ड या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

साइबर विशेषज्ञों ने अनजान लिंक, संदिग्ध क्यूआर कोड और अनजान एप्स से सावधान रहने की सलाह दी। साथ ही फिसिंग मैसेज और फेक वेबसाइट की पहचान करने के तरीके भी बताए गए। ऑनलाइन भुगतान करते समय नाम, मोबाइल नंबर और भुगतान की राशि को अच्छी तरह जांचने की अपील की गई।

कार्यक्रम में डीजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों को लेकर भी विशेष रूप से जागरूक किया गया।

विशेषज्ञों ने कहा कि साइबर ठग अक्सर पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर लोगों को डराने का प्रयास करते हैं। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय किसी विश्वसनीय व्यक्ति से संपर्क करना चाहिए और ठगी होने पर तत्काल संबंधित बैंक या सेवा प्रदाता को सूचना देकर साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करानी चाहिए। साइबर फ्रॉड की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क करने की जानकारी भी दी गई।

इसके अलावा सोशल मीडिया पर निजी जानकारी जरूरत से ज्यादा साझा नहीं करने, मोबाइल फोन, कंप्यूटर और एप्लीकेशन को समय-समय पर अपडेट रखने तथा महत्वपूर्ण डिजिटल डेटा का सुरक्षित बैकअप रखने की सलाह दी गई।

विशेषज्ञों ने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल पुलिस या तकनीकी विशेषज्ञों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में मौजूद विद्यार्थियों से अपील की गई कि वे साइबर सुरक्षा से जुड़ी जानकारी अपने परिवार, दोस्तों और आसपास के लोगों तक पहुंचाएं, ताकि अधिक से अधिक लोग ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराधों से सुरक्षित रह सकें।

कार्यक्रम के अंत में अतिथियों, साइबर विशेषज्ञों, आयोजकों और उपस्थित विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। सभी ने सुरक्षित एवं जागरूक डिजिटल समाज बनाने का संकल्प लिया।

हिन्दुस्थान समाचार/ हरीश तिवारी

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हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी