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पटाखों से बच्चों को दूर रखें, जिला अस्पताल में आपातकालीन व्यवस्था

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पटाखों से बच्चों को दूर रखें, जिला अस्पताल में आपातकालीन व्यवस्था


धमतरी, 06 नवंबर (हि.स.)। दीवाली पर पटाखों से होने वाली दुर्घटनाओं को देखते हुए जिला अस्पताल में आपातकालीन उपचार की तैयारी की गई है। जलने वाले मरीजों को तत्काल इलाज देने डाक्टरों और स्टाफ नर्सों की शिफ्टवार ड्यूटी लगाई गई है। बर्न वार्ड में 10 बेड हैं। स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों को पटाखों से दूर रखने और आतिशबाजी के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी है।

जिला अस्पताल में पिछले चार महीनों में जलने की घटनाओं के बाद उपचार के लिए 24 मरीज पहुंचे हैं। जुलाई में एक, अगस्त में छह, सितंबर में 10 और अक्टूबर में सात मरीजों का उपचार किया गया। नवंबर में अब तक जलने का कोई मरीज नहीं पहुंचा है। त्योहार के दौरान आतिशबाजी से झुलसने की आशंका को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने चिकित्सा व्यवस्था तैयार रखी है। मेडिकल आफिसरों के साथ स्टाफ नर्सों की शिफ्टवार ड्यूटी लगाई गई है, ताकि आपात स्थिति में मरीजों को तत्काल उपचार मिल सके। जिला अस्पताल के बर्न वार्ड में 10 बेड संचालित हैं। प्रसूति विभाग में मरीजों का दबाव अधिक होने के कारण बर्न के मरीज नहीं होने पर इस वार्ड का उपयोग प्रसव के बाद महिलाओं की निगरानी के लिए किया जा रहा है। प्रसव के बाद महिलाओं को यहां दो दिन तक रखा जाता है। वर्तमान में तीन बेड पर प्रसव के बाद महिलाएं भर्ती हैं। जलने की घटना में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। सही प्राथमिक उपचार से चोट की गंभीरता और संक्रमण का खतरा कम किया जा सकता है।

जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डा. आदित्य सिन्हा ने बताया कि जलने पर सबसे पहले मरीज को आग या गर्मी के स्रोत से दूर सुरक्षित स्थान पर ले जाएं। जले हुए हिस्से को सामान्य ठंडे बहते पानी के नीचे करीब 20 मिनट तक रखें। अंगूठी, घड़ी, चूड़ी और बेल्ट जैसी चीजें सावधानी से हटा दें, ताकि सूजन बढ़ने पर परेशानी न हो। इसके बाद जले हुए हिस्से को साफ, सूखे और न चिपकने वाले कपड़े या संक्रमण मुक्त पट्टी से ढकें। जलने पर अक्सर लोग घरेलू नुस्खे अपनाते हैं, जो नुकसानदायक हो सकते हैं। जले हुए हिस्से पर टूथपेस्ट, हल्दी, तेल, घी या मक्खन न लगाएं। सीधे बर्फ भी न लगाएं। त्वचा पर बने फफोलों को न फोड़ें और चिपके हुए कपड़ों को जबरदस्ती न खींचें। गंभीर रूप से झुलसने, सांस लेने में परेशानी होने या चेहरे और गर्दन के जलने पर तत्काल अस्पताल पहुंचाएं। जरूरत पड़ने पर 108 एंबुलेंस की मदद लें। जलने वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार के तौर पर आईवी फ्ल्यूड दिया जाता है। अस्पताल में 30 से 40 प्रतिशत तक झुलसे मरीजों के उपचार की सुविधा है। इससे अधिक गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद उच्च स्वास्थ्य संस्थान भेजा जाता है।

उन्होंने लोगों से अपील की है कि छोटे बच्चों को पटाखों से दूर रखें। बच्चों को अकेले पटाखे न जलाने दें। हाथ में रखकर पटाखे जलाने और आतिशबाजी के दौरान स्टंट करने से बचें। सिंथेटिक कपड़े पहनकर पटाखे न फोड़ें। आतिशबाजी करते समय पर्याप्त दूरी रखें और सावधानी बरतें, ताकि किसी तरह की दुर्घटना न हो।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा