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झीरम हत्याकांड के पीछे मौजूद ‘आपराधिक राजनीतिक षड्यंत्र’ की तह तक पहुंचना अभी बाकी-चरण दास महंत

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झीरम हत्याकांड के पीछे मौजूद ‘आपराधिक राजनीतिक षड्यंत्र’ की तह तक पहुंचना अभी बाकी-चरण दास महंत


झीरम हत्याकांड के पीछे मौजूद ‘आपराधिक राजनीतिक षड्यंत्र’ की तह तक पहुंचना अभी बाकी-चरण दास महंत


-छत्तीसगढ़ की जनता और कांग्रेस परिवार को न्याय नहीं मिला :दीपक

रायपुर, 05 सितंबर (हि.स.)।छत्तीसगढ़ विधानसभा नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने झीरम घाटी मामले में आज आए अदालती फैसले और तत्कालीन परिस्थितियों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि इस जघन्य हत्याकांड के पीछे मौजूद ‘आपराधिक राजनीतिक षड्यंत्र’ की तह तक पहुंचना अभी बाकी है।

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि, खुफिया इनपुट के बावजूद सुरक्षा में चूक क्यों, इंटेलिजेंस ब्यूरो द्वारा स्पष्ट लिखित सूचना दी गई थी कि क्षेत्र में नक्सलियों की हलचल है। इसके बावजूद जगदलपुर से सुकमा मार्ग के अति-संवेदनशील क्षेत्र में एक भी सुरक्षाकर्मी क्यों तैनात नहीं था? डॉ. महंत ने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर पूर्व सूचना पहले से दी गई थी। कांग्रेस पार्टी की ओर से काफिले के प्रस्थान, मार्ग और उसमें शामिल शीर्ष नेतृत्व की विस्तृत जानकारी डीजीपी से लेकर स्थानीय एसपी तक को विधिवत दी गई थी। इसके बाद भी पूरे रूट को सुरक्षाविहीन किसके आदेश पर छोड़ा गया।

डॉ. महंत ने कहा कि, सुरक्षा वापसी पर जवाबदेही और पूर्व उप मुख्यमंत्री का यह बयान बेहद गंभीर है कि उस संवेदनशील क्षेत्र में कोई सुरक्षा बल मौजूद नहीं था। यह स्वतः स्पष्ट करता है कि काफिले को जानबूझकर मौत के मुंह में धकेला गया।

उन्होंने मांग की है कि, सुरक्षा वापस लेने और आईबी अलर्ट की अनदेखी करने वाले तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों व उच्चस्तरीय पदों पर बैठे लोगों की भूमिका की निष्पक्ष, व्यापक जांच कर षड्यंत्रकारियों को कड़ी से कड़ी सजा नहीं दी जाती तब तक यह न्याय अधूरा है।

झीरम घाटी नक्सली हमला मामले में विशेष अदालत के फैसले के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पत्रकारवार्ता कर कहा कि पीड़ित परिवार, बस्तर, छत्तीसगढ़ की जनता और कांग्रेस परिवार को न्याय नहीं मिला है। झीरम घाटी का हमला सिर्फ नक्सली हमला नहीं था, बल्कि राजनीतिक षड्यंत्र और हत्या थी। उन्होंने पूर्व मुख्‍यमंत्री डॉ.रमन सिंह और गृह मंत्री के नार्को टेस्ट की मांग की ।उन्होंने यह भी कहा कि तत्कालीन मुख्य सचिव, डीजीपी, एडीजी नक्सल और बड़े आत्मसमर्पित नक्सली का नार्को टेस्ट हो, तभी सच सामने आएगा।

न्यायालय के फैसले पर पूर्व विधायक अनिता योगेंद्र शर्मा ने निराशा व्यक्त करते हुए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि झीरम घाटी में हुए नरसंहार के पीछे के वास्तविक षड्यंत्रकारियों को सामने लाने के बजाय उन्हें बचाने का प्रयास किया जा रहा है। पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि, सरकार की भूमिका से ऐसा प्रतीत होता है कि वह झीरम घाटी हत्याकांड के असली षड्यंत्रकारियों को बचाने का काम कर रही है।

हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा