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रेत खदानों पर प्रतिबंध के बावजूद अवैध परिवहन जारी

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रेत खदानों पर प्रतिबंध के बावजूद अवैध परिवहन जारी


धमतरी, 14 अक्टूबर (हि.स.)। जिले में रेत उत्खनन पर प्रतिबंध के बावजूद अवैध परिवहन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बारिश थमने और महानदी में रेत की उपलब्धता बढ़ने के साथ ही रेत कारोबारियों की गतिविधियां तेज होने की बात सामने आ रही है।

दावा किया जा रहा है कि जिले में 200 से अधिक हाईवा और ट्रैक्टर रेत के परिवहन में लगे हुए हैं। जिले में 19 वैध रेत खदानें स्वीकृत हैं, जहां 15 अक्टूबर तक रेत उत्खनन प्रतिबंधित है। इसके बावजूद विभिन्न रेत घाटों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहनों के जरिए रेत निकासी और परिवहन किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि बारिश और बाढ़ के बाद महानदी में रेत की उपलब्धता बढ़ी है। रेत की गुणवत्ता बेहतर होने के कारण इसकी मांग भी बढ़ गई है। इसका फायदा उठाकर कुछ कारोबारी प्रतिबंध की अवधि में भी रेत का अवैध परिवहन कर रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, रातभर सड़कों पर हाईवा दौड़ते हैं, जबकि सुबह करीब चार बजे से ट्रैक्टरों की आवाजाही शुरू हो जाती है। रेत से भरे भारी वाहनों के लगातार चलने से यातायात प्रभावित होने के साथ सड़कों पर दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है। खनिज विभाग की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि विभाग कभी-कभार कुछ वाहनों को पकड़कर कार्रवाई करता है, लेकिन बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध परिवहन पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए नियमित निगरानी और सख्त कार्रवाई की जरूरत है। यदि प्रतिबंध की अवधि में रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन पर लगातार कार्रवाई की जाए, तो नियमों का उल्लंघन करने वालों पर अंकुश लगाया जा सकता है और शासन के राजस्व को होने वाले नुकसान को भी रोका जा सकता है। हालांकि, 200 से अधिक वाहनों के अवैध परिवहन में लगे होने के दावे और संबंधित रेत घाटों की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि किया जाना जरूरी है।

जिले में स्वीकृत 19 वैध रेत खदानों में परेवाडीह, दोनर, दर्री, लीलर, बुड़ेनी, गिरौद-1, गिरौद-2, गाड़ाडीह, नारी, अरौद, मंदसौर, चंद्रसूर, परखंदा, सोनेवारा, बारना, नारधा, मोहरेंगा, डमकाडीह और तेंदूकोन्हा शामिल हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा