स्कूलाें में मंत्र जाप की अनिवार्यता के विरोध में मुस्लिम समाज की मौन रैली, राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन
गौरेला पेण्ड्रा मरवाही, 22 जून (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में छात्रों से मंत्रजाप करवाने की अनिवार्यता को लेकर जिले में मुस्लिम विकास मंच के अध्यक्ष असद सिद्दीकी की अगुवाई में समाज ने विरोध जताते हुए आज साेमवार काे मौन रैली निकाली। इस दौरान लोग हाथों में ‘तुगलकी फरमान वापस लो’ जैसी लिखी तख्तियां पकडे़ नजर आए। कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर उन्होंने राज्यपाल के नाम से ज्ञापन सौंपा, जिसमें स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश को निरस्त करने की मांग की गई।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने 12 जून को एक आदेश जारी कर नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से राज्य के सभी शासकीय स्कूलों में प्रार्थना सभा के दौरान सरस्वती वंदना और विभिन्न मंत्रों के जाप (जैसे भोजन मंत्र, गायत्री मंत्र और गुरु मंत्र) को अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। इस आदेश का मुस्लिम समाज ने विरोध करते हुए इसे “तुगलकी फरमान” करार दिया है। समाज का कहना है कि मंत्र जाप को तीन चरणों में लागू करने की तैयारी की जा रही है, जो संविधान की भावना के विपरीत है।
मुस्लिम समाज का तर्क है कि यह निर्णय नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता का हनन करता है। उनका कहना है कि प्रत्येक व्यक्ति का अपना धर्म और इबादत का तरीका होता है। संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता प्राप्त है, जबकि अनुच्छेद 28(1) स्पष्ट रूप से कहता है कि सरकारी या राज्य से वित्तपोषित शैक्षणिक संस्थानों में किसी प्रकार की धार्मिक शिक्षा नहीं दी जा सकती। समाज का आरोप है कि किसी एक धर्म से जुड़े मंत्रों और प्रार्थनाओं को सभी छात्रों के लिए अनिवार्य करना इन संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ है।
मुस्लिम समाज ने समानता के अधिकार का भी मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि इस तरह की अनिवार्यता से अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों में भेदभाव की भावना उत्पन्न हो सकती है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 में प्रदत्त समानता के अधिकार का उल्लंघन है। ज्ञापन में समाज ने वर्ष 2002 के अरुणा राय व यूनियन ऑफ इंडिया मामले का भी हवाला दिया है, जिसमें सरकारी शिक्षण संस्थानों में किसी विशेष धर्म की उपासना या धार्मिक अनुष्ठान को बढ़ावा देने को अनुचित बताया गया था।
मुस्लिम समाज ने मांगे पूरी नहीं होने पर आंदोलन और कोर्ट जाने की चेतावनी दी है। संगठन के अध्यक्ष असद सिद्दीकी ने स्पष्ट किया कि इस आदेश के विरोध में उनका पहला कदम मौन जुलूस और शांतिपूर्ण धरना देना था। इस उम्मीद के साथ अपनी मांग रख रहे हैं कि सरकार को यह गैर-संवैधानिक आदेश वापस ले। अगर सरकार अपनी हठधर्मिता पर अड़ी रहती है और इसे वापस नहीं लेती, तो वह कोर्ट का रुख करेंगे। जब सरकारें इस तरह के असंवैधानिक फैसले लेती हैं, तब अदालत ही न्याय का एकमात्र सहारा बचती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / चन्द्र नारायण शुक्ल

