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धमतरी की ऐतिहासिक वनोपज मंडी फिर हुई गुलजार, हर सोमवार लगेगी बोली

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धमतरी की ऐतिहासिक वनोपज मंडी फिर हुई गुलजार, हर सोमवार लगेगी बोली


श्यामतराई मंडी में वनोपज और औषधीय उत्पादों की खरीदी-बिक्री शुरू, पांच स्व-सहायता समूहों को मिले 25-25 हजार रुपये के प्रोत्साहन चेक

धमतरी, 12 अक्टूबर (हि.स.)। धमतरी की व्यापारिक विरासत और वनांचल की समृद्ध प्राकृतिक संपदा से जुड़ी दशकों पुरानी वनोपज मंडी एक बार फिर गुलजार हो उठी है। श्यामतराई स्थित कृषि उपज मंडी परिसर में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत वनोपज एवं औषधीय उत्पादों के नियमित क्रय-विक्रय का शुभारंभ आज पूर्व विधायक रंजना साहू ने किया। अब प्रत्येक सोमवार को सुबह 10 बजे से यहां वनोपज की खरीदी-बिक्री होगी।

खुली बोली के माध्यम से किसानों, वनोपज संग्राहकों और ग्रामीण उत्पादकों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इस पहल से स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलने के साथ वन आधारित आजीविका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। शुभारंभ अवसर पर आठ कृषक अपने उत्पाद लेकर मंडी पहुंचे। इनमें सुमन साहू, मोतीराम देवांगन, सखाराम नेताम, काल मेष, भारत नेताम, अशोक सिन्हा, कपिल देवसी और साहिल निषाद सहित अन्य उत्पादक शामिल रहे। कृषकों द्वारा अश्वगंधा, हर्रा और गिलोय सहित विभिन्न वनोपज एवं औषधीय उत्पाद बिक्री के लिए लाए गए। अतिथियों की उपस्थिति में बोली लगाकर उत्पादों का क्रय-विक्रय किया गया। इससे उत्पादकों को स्थानीय बाजार उपलब्ध कराने और प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य निर्धारण की दिशा में पहल हुई।

वनोपज का उचित मूल्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्राथमिकता : रंजना साहू

पूर्व विधायक रंजना साहू ने कहा कि धमतरी की पुरानी वनोपज मंडी का दोबारा संचालन जिले की व्यापारिक परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ किसानों और वनोपज संग्राहकों के हित में महत्वपूर्ण कदम है। वनांचल के अनेक परिवार अपनी आजीविका के लिए लघु वनोपज और प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर हैं। ऐसे में उन्हें स्थानीय स्तर पर नियमित बाजार उपलब्ध कराना आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में उपयोगी पहल है। उन्होंने कहा कि किसानों, ग्रामीण परिवारों और वन आधारित आजीविका से जुड़े लोगों के लिए संग्रहण, प्रसंस्करण, विपणन और स्वरोजगार के अवसर विकसित करना जरूरी है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, कृषि अवसंरचना निधि तथा किसान उत्पादक संगठनों को प्रोत्साहन जैसी योजनाओं के साथ स्थानीय बाजारों को मजबूत किया जाए, तो उत्पादकों को अपनी मेहनत का बेहतर प्रतिफल मिल सकता है। उन्होंने व्यापारियों से मंडी में सक्रिय भागीदारी निभाने और अधिक से अधिक किसानों एवं संग्राहकों को इस व्यवस्था से जोड़ने की अपील की।

कच्ची वनोपज से मूल्य संवर्धन तक विकसित होगी पूरी श्रृंखला : कलेक्टर

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि ऐतिहासिक वनोपज मंडी को पुनः सक्रिय करने का उद्देश्य जिले के किसानों और वनोपज संग्राहकों को स्थानीय स्तर पर बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है। प्रत्येक सप्ताह नियमित खरीदी-बिक्री होने से दूरस्थ बाजारों पर निर्भरता कम होगी तथा समय और परिवहन लागत की बचत हो सकेगी। धमतरी में वनोपज एवं औषधीय उत्पादों के प्रसंस्करण, पैकेजिंग और मूल्य संवर्धन की व्यापक संभावनाएं हैं। जरूरत इस बात की है कि वन क्षेत्र से प्राप्त उत्पाद केवल कच्चे रूप में बाहर न जाएं, बल्कि उनके संग्रहण से लेकर प्रसंस्करण और विपणन तक की गतिविधियां स्थानीय स्तर पर विकसित हों। इससे वनोपज पर निर्भर परिवारों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ युवाओं, महिला समूहों और स्थानीय उद्यमियों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। पांच स्व-सहायता समूहों को मिले 25-25 हजार रुपये के चेक। कार्यक्रम में कृषि सुधार विस्तार कार्यक्रम के अंतर्गत पांच स्व-सहायता समूहों को 25-25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि के चेक वितरित किए गए। व्यक्तिगत कृषकों को भी सम्मानित किया गया।

हर सोमवार सुबह 10 बजे से होगी खरीदी-बिक्री

कृषि उपज मंडी समिति धमतरी द्वारा श्यामतराई मंडी परिसर के शेड क्रमांक-1 में पोल क्रमांक 4 से 8 तक का हिस्सा वनोपज एवं अन्य औषधीय उत्पादों के क्रय-विक्रय के लिए निर्धारित किया गया है। यहां प्रत्येक सोमवार सुबह 10 बजे से कार्य समाप्ति तक खरीदी-बिक्री होगी। कृषक और वनोपज संग्राहक अपनी उपज लेकर निर्धारित स्थल पर पहुंच सकते हैं।

वनमंडलाधिकारी कृष्णा जाधव ने जिले में उपलब्ध वनोपज और वन संपदा की संभावनाओं की जानकारी दी। जिला लघु वनोपज व्यापारी संघ के अध्यक्ष इस्तियाक रोकड़िया और सत्यनारायण राठी ने भी अपने विचार रखे। धमतरी का श्यामतराई क्षेत्र लंबे समय से वनोपज व्यापार से जुड़ा रहा है। वनांचल और मैदानी क्षेत्रों के बीच स्थित होने के कारण यह स्थानीय उत्पादों के कारोबार का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। पहले अनेक उत्पादकों और व्यापारियों को वनोपज एवं औषधीय उत्पादों के व्यापार के लिए बस्तर और जगदलपुर जैसे केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ता था। अब नियमित मंडी सुविधा से स्थानीय स्तर पर व्यापार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा