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तहसील नहीं, अब गांव में हो रही सुनवाई, लिंक कोर्ट से बदल रही डूबान क्षेत्र की तस्वीर

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तहसील नहीं, अब गांव में हो रही सुनवाई, लिंक कोर्ट से बदल रही डूबान क्षेत्र की तस्वीर


हेमनारायण और ओंकार साहू के वर्षों पुराने भूमि अभिलेख हुए दुरुस्त, गांव में ही मिल रहा राजस्व मामलों का समाधान

धमतरी, 05 जून (हि.स.)। प्रशासनिक सेवाओं को आमजन तक पहुंचाने की दिशा में धमतरी जिला प्रशासन की अभिनव पहल ‘लिंक कोर्ट’ दूरस्थ और डूबान प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत बनकर उभरी है। कभी छोटे-छोटे राजस्व मामलों के लिए तहसील और जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर ग्रामीण अब अपने ही गांव में त्वरित सुनवाई और समाधान प्राप्त कर रहे हैं।

राज्य शासन की मंशा के अनुरूप कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में विकासखंड नगरी के बोरई और विकासखंड धमतरी के अकलाडोंगरी में संचालित लिंक कोर्ट ग्रामीणों को उनके घर के समीप राजस्व सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। गुरुवार को अकलाडोंगरी लिंक कोर्ट के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने ग्रामीणों से संवाद कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और प्रकरणों के निराकरण की प्रक्रिया का अवलोकन किया।

कलेक्टर ने कहा कि दूरस्थ एवं डूबान प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों को राजस्व सेवाओं की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। लिंक कोर्ट के माध्यम से नामांतरण, सीमांकन, खाता विभाजन और अभिलेख सुधार जैसे मामलों का समयबद्ध निराकरण किया जा रहा है, जिससे लोगों को अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिली है। इस पहल की उपयोगिता उस समय और स्पष्ट हुई जब ग्राम तांसी निवासी हेमनारायण बजरंग से जुड़े जटिल नामांतरण प्रकरण का समाधान स्थानीय स्तर पर किया गया।

भूमि अभिलेख में दर्ज अनेक हितबद्ध पक्षकारों के बयान और आवश्यक प्रक्रियाएं गांव में ही पूरी कर ली गईं। पहले ऐसे मामलों में ग्रामीणों को बार-बार तहसील कार्यालय जाना पड़ता था, लेकिन अब पूरी कार्रवाई उनकी सुविधा के अनुरूप गांव में ही संपन्न हो रही है। इसी तरह ग्राम अकलाडोंगरी के ओंकार साहू का वर्षों पुराना भूमि अभिलेख सुधार का मामला भी लिंक कोर्ट के माध्यम से सुलझाया गया। वर्ष 2011 में खरीद गई भूमि का नामांतरण विभिन्न कारणों से लंबित था, जिसे सभी पक्षों की सुनवाई के बाद राजस्व अभिलेख में आवश्यक सुधार कर निराकृत किया गया तथा सुधार पत्रक भी सौंपा गया। वहीं 12 हितबद्ध पक्षकारों वाले एक जटिल और विवादित नामांतरण प्रकरण का स्थानीय स्तर पर समाधान इस पहल की महत्वपूर्ण उपलब्धि रहा। सभी पक्षकारों के बयान मौके पर दर्ज किए गए, जिससे वर्षों से लंबित प्रक्रिया को गति मिली और शीघ्र निराकरण का मार्ग प्रशस्त हुआ।

समय, श्रम और आर्थिक व्यय की हो रही बचत

लिंक कोर्ट केवल राजस्व विवादों के समाधान का मंच नहीं, बल्कि सुशासन की उस अवधारणा का सशक्त उदाहरण है जिसमें प्रशासन स्वयं नागरिकों तक पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान करता है। इससे ग्रामीणों का समय, श्रम और आर्थिक व्यय बच रहा है, वहीं प्रशासन के प्रति उनका विश्वास भी मजबूत हो रहा है। प्रत्येक गुरुवार को अकलाडोंगरी और प्रत्येक शुक्रवार को बोरई में नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे लिंक कोर्ट अब ग्रामीणों के लिए न्याय और प्रशासनिक सुविधा के नए केंद्र बन चुके हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा