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गेवरा खदान में दाे घंटे उत्पादन ठप, रोजगार मांग को लेकर किसान सभा का प्रदर्शन

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गेवरा खदान में दाे घंटे उत्पादन ठप, रोजगार मांग को लेकर किसान सभा का प्रदर्शन


गेवरा खदान में दाे घंटे उत्पादन ठप, रोजगार मांग को लेकर किसान सभा का प्रदर्शन


समाधान नहीं होने पर 24 अप्रैल को कुसमुंडा में खदान बंद की चेतावनी

कोरबा, 10 अप्रैल (हि. स.)। रोजगार और लंबित प्रकरणों के निराकरण की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ किसान सभा (सीजीकेएस) के नेतृत्व में भू-विस्थापितों ने आज शुक्रवार को गेवरा खदान में करीब दो घंटे तक कोयला उत्पादन ठप कर प्रदर्शन किया। आंदोलन के चलते खदान क्षेत्र में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे।

प्रदर्शन में एसईसीएल के कुसमुंडा, गेवरा, दीपका और कोरबा क्षेत्र के प्रभावित गांवों के भू-विस्थापित शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने छोटे खातेदारों को रोजगार, अर्जन के बाद जन्मे आश्रितों को नौकरी तथा लंबित रोजगार प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने की मांग उठाई। साथ ही आउटसोर्सिंग कंपनियों में प्रभावित गांवों के बेरोजगारों को 100 प्रतिशत रोजगार देने की मांग भी की गई।

आंदोलन की पूर्व सूचना होने के कारण खदान परिसर में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। प्रदर्शन के दौरान प्रबंधन की ओर से बिलासपुर मुख्यालय में बैठक आयोजित कर समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया गया, जिसके बाद आंदोलन समाप्त किया गया।

किसान सभा ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई तो 24 अप्रैल को कुसमुंडा क्षेत्र में पुनः खदान बंद कर उग्र आंदोलन किया जाएगा। संगठन द्वारा आगामी आंदोलन के संबंध में अधिकारियों को पूर्व में ही नोटिस सौंपा जा चुका है।

प्रदेश संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने कहा कि जिन किसानों की भूमि एसईसीएल द्वारा अधिग्रहित की गई है, उन सभी भू-विस्थापितों को स्थायी रोजगार दिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि छोटे खातेदारों को न तो पर्याप्त मुआवजा मिल रहा है और न ही रोजगार, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है।

जिला सचिव दीपक साहू ने कहा कि लंबित रोजगार प्रकरणों के निराकरण में एसईसीएल गंभीरता नहीं दिखा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि छोटे और बड़े खातेदारों के नाम पर किसानों को बांटने का प्रयास किया जा रहा है तथा आउटसोर्सिंग कंपनियों में स्थानीय प्रभावितों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही।

भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ के दामोदर श्याम ने बताया कि वर्ष 1978 से 2004 के बीच कोयला खनन के लिए अधिग्रहित भूमि के बदले आज तक सैकड़ों प्रभावितों को न रोजगार मिला है और न ही समुचित पुनर्वास।

वहीं, विस्थापित रमेश दास ने आरोप लगाया कि आउटसोर्सिंग कंपनियों में स्थानीय बेरोजगारों को नए नियमों के नाम पर वंचित किया जा रहा है, जबकि बाहरी लोगों की भर्ती की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस मुद्दे पर आगे भी आंदोलन जारी रहेगा।

प्रदर्शन में बड़ी संख्या में प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीण और भू-विस्थापित उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार/ हरीश तिवारी

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हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी