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संघर्ष से सफलता तक: सविता कर्ष की लखपति दीदी बनने की कहानी

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संघर्ष से सफलता तक: सविता कर्ष की लखपति दीदी बनने की कहानी


मेहनत, विश्वास और समूह के सहयोग से बनी लखपति दीदी

जांजगीर-चांपा 6 मार्च (हि. स.)। जिले के विकासखंड नवागढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत केरा की निवासी सविता कर्ष की, जिन्होंने मेहनत, आत्मविश्वास और स्व-सहायता समूह के सहयोग से आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। सविता कर्ष वर्ष 1 जनवरी 2013 को गठित तुलसी महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें न केवल नई सोच और अवसर मिले, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का संकल्प भी मजबूत हुआ।

सविता कर्ष ने बताया कि उनकेे समूह को कुल 2 लाख रूपये की राशि बैंक से ऋण प्राप्त हुआ था। जिसमें से समूह के द्वारा 42000 रूपये की राशि मुझे व्यक्तिगत रूप से उपलब्ध कराई गई। इसके अलावा ओएसएफ से 25600 की राशि, सीआईएफ से 22300 की राशि एवं स्वसहायता समूह द्वारा 12000 रूपये की राशि प्राप्त हुई। इस राशि का सदुपयोग करते हुए उन्होंने अपने गांव में कपड़ों की दुकान शुरू की। शुरुआत में यह व्यवसाय छोटे स्तर पर था, लेकिन उनके परिश्रम और लगन ने धीरे-धीरे इसे क्षेत्र में पहचान दिलाई। आज उनकी दुकान “श्रृंगार सदन” के नाम से जानी जाती है। लगातार मेहनत और ग्राहकों के विश्वास के कारण उनका व्यवसाय निरंतर आगे बढ़ता गया। वर्तमान में सविता कर्ष की मासिक आय लगभग 25 हजार रुपये है और वे प्रतिवर्ष करीब 3 लाख रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। इस आय से वे अपने परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा और घर की जिम्मेदारियों को भी बेहतर तरीके से निभा रही हैं।

सविता कर्ष की यह सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह संदेश भी है कि यदि महिलाएं संगठित होकर आत्मविश्वास और मेहनत के साथ आगे बढ़ें, तो वे आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं। आज सविता कर्ष अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनकी कहानी बताती है कि समूह की ताकत, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास से हर महिला “लखपति दीदी” बनने का सपना साकार कर सकती है।

हिन्दुस्थान समाचार/लालिमा शुक्ला पुरोहित

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हिन्दुस्थान समाचार / LALIMA SHUKLA PUROHIT