home page

100 एकड़ वनभूमि में पेड़ों की कटाई के बाद वन विभाग का एक्शन, पुलिस बल के साथ पहुंची टीम

 | 
100 एकड़ वनभूमि में पेड़ों की कटाई के बाद वन विभाग का एक्शन, पुलिस बल के साथ पहुंची टीम


गम्हरिया के नारंगी क्षेत्र में ग्रामीणों के सामने अतिक्रमण नहीं करने की समझाइश, सीमा पर तार फेंसिंग का प्रस्ताव

बलरामपुर, 07 सितंबर (हि.स.)।जिले के रामानुजगंज वन परिक्षेत्र में ग्राम गम्हरिया के रोजवादामर और नारंगी क्षेत्र में 100 एकड़ से अधिक वनभूमि में पेड़ों की कटाई और कथित अतिक्रमण की तैयारी के मामले में वन विभाग ने अब कार्रवाई शुरू कर दी है। सोमवार को वन मंडलाधिकारी बलरामपुर और वन परिक्षेत्राधिकारी रामानुजगंज के निर्देश पर वन विभाग का अमला पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचा। टीम ने पूरे ग्रामवासियों की मौजूदगी में वनभूमि की स्थिति का जायजा लिया और अतिक्रमण नहीं करने की समझाइश दी।

वन विभाग के समस्त स्टाफ और पुलिस बल की मौजूदगी में नारंगी क्षेत्र में ग्रामीणों को वनभूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध अतिक्रमण नहीं करने के लिए कहा गया। विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया कि वनभूमि को सुरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है और किसी भी तरह का नया अतिक्रमण स्वीकार नहीं किया जाएगा।

वनभूमि को भविष्य में अतिक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए विभाग ने अतिक्रमित क्षेत्र की सीमा लाइन पर तार फेंसिंग कराने का प्रस्ताव रखा है। तार फेंसिंग होने के बाद वनभूमि की सीमा स्पष्ट होगी और क्षेत्र में अतिक्रमण पर निगरानी रखना भी आसान होगा। विभाग की ओर से क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई आगे बढ़ाने की बात कही गई है।

मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने भी वन विभाग को सहयोग का भरोसा दिया। ग्रामीणों की ओर से कहा गया कि नारंगी क्षेत्र में ग्रामवासी किसी प्रकार का अतिक्रमण नहीं करेंगे। साथ ही वन विभाग के सहयोग से आगामी वर्ष क्षेत्र में वृक्षारोपण किए जाने की बात कही गई।

पेड़ों की कटाई से प्रभावित बताए जा रहे क्षेत्र को दोबारा हराभरा करने की दिशा में भी पहल की जा रही है। ग्रामीणों ने विभाग के सहयोग से आगामी वर्ष वृक्षारोपण करने पर सहमति जताई है। इससे वनभूमि पर दोबारा हरियाली विकसित करने और क्षेत्र को सुरक्षित रखने की उम्मीद बढ़ी है।

गम्हरिया के रोजवादामर क्षेत्र में वन विभाग द्वारा पूर्व में किए गए प्लांटेशन के पेड़ों की बड़े पैमाने पर कटाई किए जाने का मामला सामने आया था। ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में आंवला, बहेरा, हर्रा समेत कई औषधीय और बेशकीमती प्रजातियों के पौधे लगाए गए थे। आरोप था कि पिछले करीब 15 से 20 दिनों से लगातार पेड़ों की कटाई की जा रही थी।

ग्रामीणों ने दावा किया था कि 100 एकड़ से अधिक वनभूमि में हजारों पेड़ काटे जा चुके हैं। कई स्थानों पर मचान बनाए जाने की बात भी सामने आई थी। ग्रामीणों का आरोप था कि वनभूमि पर कब्जे की कोशिश के चलते पेड़ों की कटाई की जा रही है।

वन प्रबंधन समिति को लेकर भी उठे थे सवाल

मामले को लेकर ग्राम गम्हरिया में ग्रामीणों और वन प्रबंधन समिति के सदस्यों की बैठक भी हुई थी। ग्रामीणों ने वन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष जाकिर अंसारी को लेकर भी आरोप लगाए थे। एक ग्रामीण ने नाम नहीं छापने की शर्त पर उन पर वनभूमि पर कब्जे में शामिल होने का आरोप लगाया था। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई थी।

रेंजर ने कार्रवाई का दिया था भरोसा

मामले में रामानुजगंज रेंजर डॉक्टर दिलरुबा ए बानो ने कहा था कि वन विभाग पूरे मामले में विधिसम्मत कार्रवाई करेगा। वनभूमि पर किए गए कथित अवैध निर्माण की जांच संयुक्त टीम के माध्यम से कराने और नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही गई थी। पेड़ों की कटाई तथा वनभूमि पर कब्जे से जुड़े मामले में भी कार्रवाई का भरोसा दिया गया था।

अब निगरानी और सुरक्षा पर रहेगी नजर

वन विभाग की टीम के मौके पर पहुंचने और ग्रामीणों के सामने अतिक्रमण नहीं करने की समझाइश दिए जाने के बाद अब क्षेत्र की सुरक्षा और निगरानी महत्वपूर्ण होगी। तार फेंसिंग के प्रस्ताव के साथ आगामी वर्ष वृक्षारोपण की योजना पर बनी सहमति से वनभूमि को सुरक्षित रखने की दिशा में कदम आगे बढ़ा है। अब यह देखना होगा कि प्रस्तावित तार फेंसिंग और वृक्षारोपण की कार्रवाई किस समय तक पूरी होती है और क्षेत्र में पेड़ों की कटाई व अतिक्रमण पर किस तरह स्थायी रोक लगती है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय