बस्तर में बाढ़ का पानी उतरने के साथ अगली चुनौती, धराशायी मकान की
जगदलपुर, 28 सितंबर (हि.स.)। बस्तर में लगातार कई दिनों की बारिश के बाद आई भीषण बाढ़ अब धीरे-धीरे उतरने लगी है। इंद्रावती नदी का जलस्तर कम होने से प्रशासन और लोगों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन बाढ़ का संकट अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। बड़ी संख्या में प्रभावित परिवार राहत शिविरों में रहने के लिए मजबूर हैं।
जगदलपुर और आस-पास के ग्रामीण इलाकों में बाढ़ ने घरों, सड़कों एवं फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। पानी का दबाव झेल नहीं पाने के कारण कई इलाकों में कच्चे मकान धराशायी हो गए हैं। पानी उतरने के साथ अब अगली चुनौती बाढ़ प्रभावित इलाकों में नुकसान का आकलन, घरों की स्थिति की जांच और लोगों को सुरक्षित तरीके से वापस उनके घरों तक पहुंचाना है।
भीषण बाढ़ में जिन घरों में पानी घुसा था, वहां अब पानी उतरने के बाद तबाही के निशान साफ दिखाई दे रहे हैं। कई परिवारों के सामने अब घर की मरम्मत और दोबारा सुरक्षित तरीके से रहने की बड़ी चुनौती है। बाढ़ के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। प्रशासन ने राहत शिविरों में भोजन, पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था की है। बाढ़ का पानी उतर रहा है, लेकिन बस्तर के कई परिवारों के लिए संकट अभी खत्म नहीं हुआ है।
बस्तर जिले के कलेक्टर ने राहत कार्यों को और अधिक सुदृढ़ व व्यापक बनाने के लिए सिविल सोसायटी और गैर-सरकारी संगठनों को भी शिविर व्यवस्थाओं से जोड़ने के निर्देश दिए हैं, ताकि जनसहयोग के साथ बाढ़ पीड़ितों को बेहतर से बेहतर संबल और राहत पहुंचाई जा सके।
हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे

