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सुकमा के गांवों में दिन में भी था नक्सलियों का डर, वहां देर रात बन रहे आयुष्मान कार्ड

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सुकमा के गांवों में दिन में भी था नक्सलियों का डर, वहां देर रात बन रहे आयुष्मान कार्ड


सुकमा, 20 अक्टूबर (हि.स.)। नक्सलियों के गढ़ रहे सुकमा में स्वस्थ विभाग की टीम दुर्गम गांवों में रात दस बजे तक आयुष्मान कार्ड बना रही है। इन गांवों में लोग दिन के उजाले में जाने की नहीं सोचते थे। ये जरूर है कि नदी-नाले, पहाड़ों की सीधी चढ़ाई और नेटवर्क नही मिलने की बाधाएं आती रहती हैं।

गादीरास सेक्टर के एतपाल गांव की तरफ लोग दिन में भी नहीं जाते थे, यहां नक्सलियों का राज चलता था। उस गांव में स्वस्थ विभाग की टीम आज मंगलवार काे पहुंची। गांव के लोग खेती किसानी के चलते गांव से बाहर थे, कई घर खाली मिले। टीम ने इंतजार किया। शाम को लोग लौटे तो कार्ड बनाना शुरू किया। रात 10 बजे तक स्ट्रीट लाइट के नीचे बैठकर आयुष्मान कार्ड बनाते रहे।

सुकमा कलेक्टर अमित कुमार ने मंगलवार काे बताया कि पिछले दो महीनों में 10 हजार से ज्यादा आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं। सुकमा जिला अभी कंपलीट सैचुरेशन मोड में काम कर रहा है। हमारा लक्ष्य मार्च 2027 तक सभी पात्र हितग्राहियों का आयुष्मान कार्ड बनाना है। अगर किसी व्यक्ति का आयुष्मान कार्ड नहीं बन पा रहा है तो यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि उसका आधार अपडेट है या नहीं, राशन कार्ड उपलब्ध है या नहीं और आधार तथा राशन कार्ड आपस में लिंक हैं या नहीं। हमारा प्रयास है कि मार्च 2027 तक सुकमा जिले के सभी पात्र हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड से जोड़ा जा सके।

जिला परियोजना समन्वयक अमृतेश सिंह ठाकुर ने बताया कि सुकमा जिले में मार्च से काम करते हुए यह अनुभव हुआ कि हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड की बहुत ज्यादा जरूरत है। दूरस्थ और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए गंभीर बीमारी के समय बड़े अस्पताल में उपचार कराना बड़ी चुनौती हो सकता है। आयुष्मान कार्ड उन्हें योजना के तहत उपलब्ध स्वास्थ्य सुरक्षा से जोड़ता है। हमारा लक्ष्य जिले के सभी पात्र हितग्राहियों का आयुष्मान कार्ड बनवाना और यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र व्यक्ति योजना के लाभ से वंचित न रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे