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50 साल से खेती कर रहे किसानों ने रिसार्ट के लिए जमीन देने का किया विरोध

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50 साल से खेती कर रहे किसानों ने रिसार्ट के लिए जमीन देने का किया विरोध


धमतरी, 12 अगस्त (हि.स.)। न्यू रूद्री बैराज डुबान क्षेत्र के करीब 50 एकड़ जमीन पर रिसार्ट बनाए जाने की जानकारी के बाद बरारी-मुड़पार के 77 किसान चिंतित हैं। नाराज किसानों ने खेती-किसानी वाले जमीन पर रिसार्ट नहीं बनाने मांग की है। किसानों ने कहा कि रिसार्ट बनने से उनक आजीविका समाप्त हो जाएगी।

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा से बुधवार काे ग्राम विकास समिति बरारी के अध्यक्ष रोशन लाल, सचिव मोतीलाल यादव, किसान मेला राम निषाद, महेश ध्रुव एवं लालजी निषाद ने कहा कि रुद्री बैराज बनने से पहले से वे और उनके पूर्वज इस क्षेत्र में खेती-किसानी करते आ रहे हैं। शासन द्वारा उनकी जमीन का अधिग्रहण किए जाने के बाद करीब 50 वर्षों से वे जल संसाधन विभाग से लीज पर लेकर उक्त भूमि पर कृषि कार्य कर रहे हैं। हर वर्ष लीज राशि जमा कर जमीन पर खेती करते हैं और फसल से परिवार का भरण-पोषण करते हैं। शासन द्वारा जमीन का अधिग्रहण किए जाने के बाद उनके पास खेती के लिए अन्य भूमि नहीं है। ऐसे में यह जमीन ही उनके परिवार की आजीविका का एकमात्र साधन है। मेहनत और पैसा लगाकर जमीन को खेती योग्य बनाने के बाद वर्तमान में भी यहां धान की बोआई की गई है। ग्रामीणों के अनुसार इन दिनों उक्त जमीन का नाप-जोख भी किया जा रहा है।

उनका कहना है कि पटवारी, आरआई, एसडीएम और अमीन नाप-जोख के लिए मौके पर पहुंचे थे। जमीन की नाप-जोख के बाद रिसार्ट निर्माण के लिए जमीन दिए जाने की जानकारी से किसानों की चिंता बढ़ गई है। उन्होंने प्रशासन के समक्ष आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि उनके किसानी वाले जमीन पर रिसार्ट निर्माण न कराया जाए। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि उनकी किसानी वाली जगह पर रिसार्ट नहीं बनाया जाए। उनका कहना है कि जमीन दूसरे उपयोग में चली गई तो वर्षों से खेती कर रहे परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने जमीन को किसी अन्य विभाग को सौंपने के बजाय सिंचाई विभाग के पास ही रखने की मांग की है, ताकि वे नियमानुसार लीज राशि जमा कर खेती करते रह सकें। इस दौरान कामेश नेताम, रोहित निषाद, प्रेमचंद निषाद, पितांबर ध्रुव, मिथलेश, रवि, गैंदराम, टेकराम निषाद, महेश सोनकर सहित अन्य किसान उपस्थित थे।

डुबान में फसल का जोखिम, फिर भी नहीं छोड़ी खेती

डुबान क्षेत्र में खेती करना किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण है। बारिश के दौरान जलभराव और बाढ़ की स्थिति बनने पर कई बार फसल डूब जाती है। इसके बावजूद ग्रामीणों ने वर्षों से खेती करना जारी रखा है। किसानों का कहना है कि प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण नुकसान सहने के बाद भी वे इसी जमीन से अपने परिवार का खर्च चलाते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा