पोला पर्व काे लेकर शहर में उत्साह, 10 सितंबर काे मनेगा पर्व
धमतरी, 07 सितंबर (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक पर्व पोला को लेकर शहर में तैयारियां जोर पकड़ने लगी हैं। पर्व में अब महज तीन दिन शेष है, ऐसे में बाजार में मिट्टी के बैल और पोला जाता की दुकानें सज गई हैं और इनकी पूछपरख भी शुरू हो गई है। त्योहर को आने में सीमित दिन होने के कारण मिट्टी के बैल और पोला जाता की छुटपुट खरीदारी होती रही। इससे विक्रेताओं को इस बार अच्छी बिक्री की उम्मीद है।
विक्रेता कांति बाई, सुहोदरा बाई और कुसुमबाई ने बताया कि मिट्टी के बैल के धार्मिक और पारंपरिक महत्व को समझने वाले लोग आज भी पोला पर्व पर इसकी खरीदारी जरूर करते हैं। पोला के दिन मिट्टी के बैल की विधिवत पूजा कर सुख-समृद्धि और अच्छी फसल की कामना की जाती है। पूजा के बाद बच्चे इन मिट्टी के बैलों से खेलते हुए खूब धमा-चौकड़ी करते हैं। हालांकि बाजार में लकड़ी के बैलों की उपलब्धता बढ़ने के कारण मिट्टी के बैलों की मांग में पहले की अपेक्षा कुछ कमी आई है, लेकिन परंपरा से जुड़े परिवारों में आज भी इसका विशेष आकर्षण बना हुआ है। पोला पर्व को लेकर बच्चों में भी खासा उत्साह नजर आने लगा है और वे अपने स्तर पर पर्व की तैयारियों में जुट गए हैं।
10 सितंबर को पर्व मनाना मंगलकारी: विप्र विद्वत परिषद अध्यक्ष पंडित बालेन्द्र पांडेय और मीडिया प्रभारी पंडित राजकुमार तिवारी ने बताया कि भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को पोला पर्व मनाया जाता है। इस दिन किसान कृषि कार्य में सहयोगी अपने बैलों की पारंपरिक ढंग से पूजा-अर्चना कर बेहतर और उन्नत फसल की कामना करते हैं, वहीं अन्य लोग घरों में मिट्टी के बैल की पूजा कर सुख-समृद्धि और मनवांछित फल की कामना करते हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 10 सितंबर को पोला पर्व मनाना अधिक मंगलकारी रहेगा। पोला पर्व से भगवान कृष्ण द्वारा पुलासुर नामक असुर के वध से जुड़ी लोकगाथा भी प्रचलित है। यही वजह है कि पर्व में धार्मिक आस्था के साथ कृषि संस्कृति और लोकपरंपरा का अनूठा संगम देखने को मिलता है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

