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बस्तर के किसानों की आय संवृद्धि के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग पर जोर -कृषि उत्पादन आयुक्त

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बस्तर के किसानों की आय संवृद्धि के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग पर जोर -कृषि उत्पादन आयुक्त


जगदलपुर, 26 अक्टूबर (हि.स.)। बस्तर संभाग में किसानों एवं ग्रामीणों की आय में वृद्धि करने, कृषि को लाभकारी बनाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए एकीकृत कृषि प्रणाली को बढ़ावा देना आवश्यक है। कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने जगदलपुर में संभाग स्तरीय खरीफ समीक्षा एवं रबी 2026 की तैयारी बैठक में कहा कि बस्तर में कृषि के साथ उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्यपालन, कुक्कुटपालन और अन्य आजीविका गतिविधियों को जोड़कर किसानों की आय के विविध स्रोत विकसित किए जा सकते हैं।

इससे ग्रामीण परिवारों को वर्षभर रोजगार और आमदनी के अवसर मिलेंगे तथा खेती पर मौसम और बाजार के उतार-चढ़ाव का प्रभाव भी कम किया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि बस्तर की भौगोलिक परिस्थितियों, प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय कृषि पद्धतियों को ध्यान में रखते हुए ऐसी योजनाएं तैयार की जानी चाहिए, जिनसे किसानों को कम लागत में अधिक लाभ मिल सके। एकीकृत कृषि प्रणाली के माध्यम से उपलब्ध कृषि भूमि, जल संसाधन और कृषि अवशेषों का बेहतर उपयोग करते हुए उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है।

कृषि उत्पादन आयुक्त ने एकीकृत कृषि प्रणाली की उपयोगिता पर जोर देते हुए कहा कि किसान केवल पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने के बजाय खेती के साथ पशुपालन, मत्स्यपालन, सब्जी उत्पादन, फल एवं अन्य उद्यानिकी फसलों को भी अपनाएं। खेतों के आसपास उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप आजीविका गतिविधियों का चयन करने से किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त हो सकती है।

उन्होंने कहा कि कृषि के साथ पशुपालन को जोड़ने से जैविक खाद की उपलब्धता बढ़ती है, जबकि फसल अवशेषों का उपयोग पशुओं के चारे के रूप में किया जा सकता है। इसी प्रकार सिंचाई एवं जल उपलब्धता के अनुरूप खेतों में डबरी निर्माण कर मत्स्यपालन और उसके आसपास सब्जी उत्पादन जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा सकता है। इस तरह एक ही कृषि इकाई से विभिन्न माध्यमों से आय अर्जित करने की संभावनाएं विकसित होती हैं।

कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि बस्तर संभाग के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए स्थानीय जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर कृषि आधारित आजीविका मॉडल विकसित करना महत्वपूर्ण है। इसके लिए किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीज, संतुलित उर्वरक उपयोग, कृषि यंत्रों का उपयोग, जल संरक्षण, फसल विविधीकरण तथा बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी ने अधिकारियों को कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर काम करने और खेत बचाओ अभियान को पूरी तत्परता से संचालित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने आगामी रबी मौसम के लिए ऑनलाइन उर्वरक प्रबंधन प्रणाली लागू करने और बाजार में बिकने वाले अमानक व नकली खाद, बीज एवं कीटनाशकों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने पर जोर दिया।

बैठक में कमिश्नर बस्तर डोमन सिंह ने संभाग की स्थानीय संसाधनों का समुचित उपयोग कर खेती-किसानी सहित अन्य आनुशांगिक गतिविधियों के जरिए किसानों एवं ग्रामीणों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए समन्वित प्रयास करने के लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए। बैठक में रबी 2026 के लिए कार्ययोजना के अनुसार बीज, खाद सहित अन्य कृषि आदान सामग्री की उपलब्धता तथा अल्पकालीन कृषि ऋण की सुलभता पर विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक के दौरान संभाग के जिला कलेक्टरों ने अपने जिलों में किए जा रहे नवाचारों के बारे में विस्तारपूर्वक अवगत कराया।

बैठक में संचालक पशुपालन चंद्रकांत वर्मा, प्रबंध संचालक बीज विकास निगम अजय अग्रवाल, संचालक उद्यानिकी श्री लोकेश कुमार, संचालक मत्स्यपालन नारायण नाग सहित सहकारिता, मार्कफेड, मंडी बोर्ड, अपेक्स बैंक के राज्य स्तरीय अधिकारियों के अलावा बस्तर संभाग के सभी जिलों के सीईओ जिला पंचायत तथा संबंधित विभागों के संभाग एवं जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे