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विद्युत वितरण कंपनी ने कहा मेन स्विच चालू करने की जल्दबाजी न करें

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विद्युत वितरण कंपनी ने कहा मेन स्विच चालू करने की जल्दबाजी न करें


जगदलपुर, 27 सितंबर (हि.स.)। बस्तर संभाग में हाल ही में आई भीषण बाढ़ का पानी भले ही कई रिहायशी इलाकों से धीरे-धीरे उतरने लगा हो, लेकिन प्रशासन और विद्युत वितरण कंपनी ने रविवार काे नागरिकों के लिए एक सतर्कता एडवाइजरी जारी की है।

स्पष्ट किया गया है कि पानी का कम होना खतरे के टलने का संकेत नहीं है, क्योंकि बाढ़ का पानी हटने के बाद भी कंक्रीट और दीवारों के भीतर छिपी वायरिंग हफ्तों तक नम रह सकती है। यह अदृश्य नमी जानलेवा करंट और अचानक होने वाले शॉर्ट-सर्किट का सबसे बड़ा कारण बनती है, इसलिए जब तक किसी अधिकृत और लाइसेंस प्राप्त इलेक्ट्रीशियन से पूरे परिसर की तकनीकी जांच न करा ली जाए, तब तक घरों का मेन स्विच ऑन न करने और किसी भी उपकरण को सॉकेट में न लगाने की सलाह दी गई है।

घरों में दोबारा प्रवेश करते समय नागरिकों को विशेष रूप से सतर्क रहने को कहा गया है। यदि घर के किसी हिस्से, आंगन या बेसमेंट में अभी भी पानी जमा है, तो वहां बिल्कुल कदम न रखें क्योंकि उस पानी में करंट मौजूद होने की पूरी संभावना रहती है। इसके अलावा, यदि मेन बिजली बोर्ड या ब्रेकर पैनल में नमी दिखाई दे, या आसपास का फर्श गीला हो, तो उसे स्वयं छूने या चालू करने की गलती न करें। ऐसी विषम परिस्थिति में सीधे विद्युत विभाग से संपर्क कर बाहर ट्रांसफार्मर या खंभे से ही बिजली कटवाना सबसे सुरक्षित उपाय है। साथ ही, गीली कंक्रीट की दीवारें, लोहे के खंभे, धातु के पाइप और भीगी लकड़ी की संरचनाएं भी करंट का संचालन कर सकती हैं, इसलिए घर की सफाई या मरम्मत के दौरान इनसे पर्याप्त दूरी बनाए रखना अनिवार्य है।

बाढ़ के संपर्क में आ चुके घरेलू उपकरणों और फिटिंग्स को लेकर भी तकनीकी निर्देश दिए गए हैं। फ्रिज, टीवी, वॉशिंग मशीन या कूलर जैसे जो भी उपकरण पानी में डूब चुके थे, उन्हें बिना पूरी तरह सुखाए और मैकेनिक से प्रमाणित कराए चालू न करें। इसके साथ ही, जलभराव में डूब चुके सभी पुराने स्विचबोर्ड, प्लग और सॉकेट्स को दोबारा इस्तेमाल में लाने के बजाय उन्हें पूरी तरह बदल देना ही बुद्धिमानी होगी, क्योंकि उनमें जंग और नमी से भारी स्पार्किंग का जोखिम रहता है। यदि किसी सूखे व सुरक्षित उपकरण को अनप्लग भी करना पड़े, तो पहले यह आश्वस्त कर लें कि आपके हाथ-पैर सूखे हों और आपने रबर अथवा प्लास्टिक के जूते-चप्पल पहन रखे हों। घरों के बाहर भी खतरे कम नहीं हैं, खासकर रास्तों, गलियों या खेतों में टूटे व लटके हुए बिजली के तारों से कम से कम दस मीटर की दूरी बनाए रखना जरूरी है। लगातार बारिश और बाढ़ के समय लोहे के खंभों व उन्हें सहारा देने वाले स्टे-वायर में अक्सर करंट उतर आता है, इसलिए अपने मवेशियों को इनसे दूर बांधें और बच्चों को इनके पास न जाने दें। विभाग ने अपील की है कि कहीं भी स्पार्किंग या गिरे हुए तार दिखने पर तुरंत टोल-फ्री नंबर 1912 या स्थानीय लाइनमैन को सूचना दें।

भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने नागरिकों को इलेक्ट्रीशियन से वायरिंग का इंसुलेशन रेसिस्टेंस टेस्ट करवाने, घरों में करंट का मामूली लीकेज होते ही सप्लाई काट देने वाले ईएलसीबी या आरसीसीबी ब्रेकर लगवाने और नए मीटर व स्विचबोर्ड्स को बाढ़ के संभावित जलस्तर से काफी ऊंचाई पर शिफ्ट कराने की सलाह दी है, ताकि आने वाले समय में जान-माल के भारी नुकसान से पूरी तरह बचा जा सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे