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दीपावली पर दंतेवाड़ा में मां दंतेश्वरी पूजी जाती है, माता लक्ष्मी-नारायणी के स्वरूप में

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दीपावली पर दंतेवाड़ा में मां दंतेश्वरी पूजी जाती है, माता लक्ष्मी-नारायणी के स्वरूप में


दंतेवाड़ा, 07 नवंबर (हि.स.)। दंतेवाड़ा जिले के शक्तिपीठ मां दंतेश्वरी मंदिर में दीपावली पर होने वाली पूजा देश के दूसरे देवी मंदिरों से अलग पहचान रखती है। इस दिन मां दंतेश्वरी को जंगलों से जुटाई गईं सात प्रकार की औषधियों से तैयार विशेष काढ़े से स्नान कराया जाता है। इतना ही नहीं, मां दंतेश्वरी की सालभर शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा के रूप में पूजी जाने वाली देवी दीपावली पर धन और समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी यानी नारायणी के स्वरूप में पूजी जाती है।

मां दंतेश्वरी के लक्ष्मी स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।मंदिर परिसर में भैरव और गजलक्ष्मी की एक ही शिलाखंड पर उकेरी गई दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है। दीपावली के पूजा विधान में इसका भी विशेष महत्व बताया जाता है।

माता के औषधि स्नान के लिए जरूरी जड़ी-बूटियां जुटाने की जिम्मेदारी मंदिर के बारह लंकवार सेवादारों में शामिल कतियार परिवार को सौंपी गई। इस रस्म में पंडाल और बोड़का परिवार के सदस्य भी सहयोग करते हैं।मंदिर की इस परंपरा में औषधियों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की भी अनुमति नहीं होती। जंगल से लाई गई औषधियों को मंदिर के भोग कक्ष में विशेष विधि से तैयार किया जाता है।

आज शनिवार रातभर इन्हें उबालकर इनका अर्क निकाला जायेगा,और दीपावली के दिन ब्रह्ममुहूर्त में इसी औषधीय जल से माता और मंदिर में स्थापित अन्य निर्धारित विग्रहों का स्नान कराया जायेगा। इस पूरे विधान में पुजारी जिया परिवार, कतियार और अन्य परंपरागत सेवादार अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं।

इस अनुष्ठान में केवल मंदिर के पुजारी और सेवादार ही नहीं, बल्कि स्थानीय समाजों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। कुम्हार समाज द्वारा तैयार किए गए मिट्टी के दीये, कलश और हांडी माता को अर्पित किए जाते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार इन पारंपरिक मिट्टी के पात्रों को गर्भगृह में समर्पित करने के बाद ही मंदिर परिसर में दीप प्रज्ज्वलन की शुरुआत होती है।

मां दंतेश्वरी मंदिर के पुजारी जिया के अनुसार माता यहां नारायणी स्वरूप में विराजित हैं। इसी मान्यता से मंदिर के सामने गरुड़ स्तंभ भी स्थापित है। यही वजह है कि नवरात्र और अन्य अवसरों पर शक्ति स्वरूपा दुर्गा के रूप में पूजी जाने वाली माता की दीपावली पर मां लक्ष्मी के रूप में विशेष आराधना होती है। यही वजह है कि मां दंतेश्वरी मंदिर की दीपावली बस्तर की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है।

हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे