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सदियों पुरानी परंपरा का अनूठा रंग, सेमरा में एक सप्ताह पहले मनाई गई दीपावली

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सदियों पुरानी परंपरा का अनूठा रंग, सेमरा में एक सप्ताह पहले मनाई गई दीपावली


सदियों पुरानी परंपरा का अनूठा रंग, सेमरा में एक सप्ताह पहले मनाई गई दीपावली


सदियों पुरानी परंपरा का अनूठा रंग, सेमरा में एक सप्ताह पहले मनाई गई दीपावली


सदियों पुरानी परंपरा का अनूठा रंग, सेमरा में एक सप्ताह पहले मनाई गई दीपावली


सदियों पुरानी परंपरा का अनूठा रंग, सेमरा में एक सप्ताह पहले मनाई गई दीपावली


सिरदार देव की मान्यता से जुड़ी है परंपरा

धमतरी, 04 नवंबर (हि.स.)। वक्त बदल गया, पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन सदियों पुरानी परंपरा आज भी कायम है। देशभर में दीपावली अपने निर्धारित समय पर मनाई जाती है, लेकिन धमतरी जिले के सेमरा गांव में दीपों का यह पर्व एक सप्ताह पहले ही मना लिया जाता है। गांव में मंगलवार को दीपावली का त्योहार पूरे उत्साह और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस अनूठी परंपरा के पीछे ग्रामीणों की सिरदार देव के प्रति गहरी आस्था और मान्यता जुड़ी हुई है।

धमतरी से करीब 22 किलोमीटर दूर स्थित सेमरा गांव में दीपावली के अवसर पर हर घर रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा उठा। घरों के आंगन में आकर्षक रंगोलियां सजाई गईं और दीप जलाकर खुशियां मनाई गईं। बच्चों ने गलियों में आतिशबाजी कर त्योहार का आनंद लिया। खास बात यह है कि गांव में केवल दीपावली ही नहीं, बल्कि होली, हरेली और पोला जैसे प्रमुख त्योहार भी निर्धारित तिथि से एक सप्ताह पहले मनाए जाते हैं।

ग्रामीणों के अनुसार इस परंपरा की शुरुआत सदियों पहले हुई थी। मान्यता है कि गांव के आराध्य सिरदार देव ने एक बार स्वप्न में पुजारी को दर्शन देकर सभी प्रमुख त्योहार एक सप्ताह पहले मनाने का निर्देश दिया था। तभी से ग्रामीण इस परंपरा का पालन करते आ रहे हैं।

ग्रामीण गजेंद्र कुमार सिन्हा ने बताया कि यह मान्यता उनके पूर्वजों के समय से चली आ रही है। सिरदार देव के प्रति ग्रामीणों की गहरी आस्था है और इस परंपरा की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई है। यही वजह है कि त्योहारों के अवसर पर दूसरे गांवों से भी लोग पूजा-अर्चना और उत्सव में शामिल होने पहुंचते हैं। सिरदार देव की कहानी बताते हुए ग्रामीणों ने बताया कि पुराने समय में सेमरा गांव छोटा सा बसाहट क्षेत्र था, जिसके चारों ओर जंगल थे। जंगली जानवरों और अन्य बाधाओं से ग्रामीण परेशान रहते थे। इसी दौरान बोरझरा गांव का सिरदार नामक व्यक्ति शिकार के लिए यहां पहुंचा। उसने ग्रामीणों को जंगली जानवरों के आतंक से मुक्ति दिलाई, लेकिन इस दौरान स्वयं वीरगति को प्राप्त हो गया। उसकी मृत्यु के बाद गांव के पुजारी को स्वप्न आया, जिसमें सिरदार देव ने ग्रामीणों को पहले पूजा-अर्चना करने और सभी प्रमुख त्योहार एक सप्ताह पहले मनाने की बात कही। तभी से यह परंपरा गांव की पहचान बन गई। गांव के सरपंच छबिलेश कुमार सिन्हा ने बताया कि सिरदार देव की मान्यता और आशीर्वाद से ग्रामीण पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस परंपरा को निभाते आ रहे हैं। दिवाली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा का आयोजन किया जाएगा। त्योहार के दौरान आसपास के 15 से 20 गांवों के लोग शामिल होने पहुंचते हैं। कई परिवारों के चार से पांच सदस्य मेहमान बनकर आते हैं। कभी-कभी मेहमानों की संख्या गांव की कुल आबादी से भी अधिक हो जाती है। उत्सव की तैयारियां 15 से 20 दिन पहले ही शुरू कर दी जाती हैं। ग्रामीणों का विश्वास है कि परंपरा से हटकर त्योहार मनाने पर गांव में अनहोनी और विपत्तियां आती हैं। सरपंच ने बताया कि एक बार परंपरा बदलकर त्योहार मनाने का प्रयास किया गया था, लेकिन इसके बाद कई परेशानियां सामने आईं। तब से ग्रामीण पहले की तरह सप्ताहभर पहले ही त्योहार मनाते आ रहे हैं। उत्सव में शामिल होने पहुंचे मेहमानों ने बताया कि सेमरा उनका रिश्तेदारों का गांव है। यहां सिरदार देव का मंदिर स्थापित है और उनकी आस्था के कारण वे हर साल दीपावली से एक सप्ताह पहले ही यहां पहुंचते हैं। गांव में लक्ष्मी माता की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। घरों को रंगोली और दीपों से सजाया जाता है। दो दिनों तक गांव में मेले जैसा माहौल रहता है। वहीं गांव के युवा धनेंद्र कुमार ध्रुव ने बताया कि दीपावली के दिन लक्ष्मी माता की पूजा और अगले दिन गोवर्धन पूजा की परंपरा है। यह सिलसिला कई पीढ़ियों से चला आ रहा है। युवा पीढ़ी भी अपने पूर्वजों की इस विरासत को पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ आगे बढ़ा रही है। इस तरह सेमरा गांव की एक सप्ताह पहले त्योहार मनाने की परंपरा आज उसकी विशिष्ट पहचान बन चुकी है, जिसे देखने और इसमें शामिल होने दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा