वृंदावन के बांके बिहारी की प्रतिकृति है धमतरी का राधा-कृष्ण मंदिर
-मंदिर निर्माण को पूरे हुए 103 साल, श्रद्धा-भक्ति का प्रमुख केंद्र बना बांके बिहारी मंदिर
धमतरी, 04 सितंबर (हि.स.)। शहर के सदर बाजार रोड स्थित बांके बिहारी मंदिर 103 वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां भगवान राधा-कृष्ण के दर्शन के लिए धमतरी शहर ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
मंदिर न्यास के अध्यक्ष डॉ. एनपी गुप्ता ने बताया कि मंदिर का निर्माण वर्ष 1923 में हुआ था और दो वर्ष पूर्व इसका शताब्दी वर्ष भी मनाया गया। मंदिर में स्थापित भगवान कृष्ण की संगमरमर की प्रतिमा वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर की प्रतिकृति मानी जाती है। करीब एक सदी पहले स्वर्गीय रामाधार एवं उनके सहयोगी वृंदावन से राधा-कृष्ण की संगमरमर की प्रतिमाएं धमतरी लेकर आए थे, जिनकी विधि-विधान से प्राण-प्रतिष्ठा कर मंदिर में स्थापना की गई।
मंदिर न्यास के उपाध्यक्ष सुदर्शन गुप्ता ने बताया कि लगभग 15 वर्ष पहले मंदिर का व्यापक जीर्णोद्धार किया गया, जिसके बाद इसे वर्तमान स्वरूप मिला। इससे पहले मंदिर खपरैलनुमा था। गर्भगृह और मूल ढांचे को सुरक्षित रखते हुए अंदरूनी हिस्से का भी नवीनीकरण किया गया। करीब 20 वर्ष पहले संतोषी माता, भगवान शंकर सहित अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को अलग-अलग स्थानों पर स्थापित कर मंदिर को राधा-कृष्ण मंदिर के रूप में विकसित किया गया।
उन्होंने बताया कि मंदिर की स्थापना स्वर्णकार समाज द्वारा की गई थी। प्रारंभ में समाज के प्रमुख इसके संचालन की जिम्मेदारी निभाते थे, बाद में बांके बिहारी मंदिर न्यास का गठन किया गया। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए गणेश चौक स्थित गणेश मंदिर के समीप न्यास द्वारा तीन कमरों, एक हॉल और रसोईयुक्त धर्मशाला का भी निर्माण कराया गया है।
मंदिर के पुजारी ललित मोहन मिश्रा ने बताया कि भगवान राधा-कृष्ण के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर में चार दिवसीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। एक सदी से अधिक समय से बांके बिहारी मंदिर धमतरी की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

