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खस की खुशबू से बदली तकदीर, परखंदा बना महिला सशक्तिकरण और हरित विकास का मॉडल

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खस की खुशबू से बदली तकदीर, परखंदा बना महिला सशक्तिकरण और हरित विकास का मॉडल


धमतरी, 25 अप्रैल (हि.स.)। धमतरी जिले के कुरुद विकासखंड का गांव परखंदा आज बदलाव की ऐसी कहानी लिख रहा है, जो न सिर्फ प्रेरक है, बल्कि ग्रामीण आत्मनिर्भरता का मजबूत उदाहरण भी बन गया है। कभी वर्षा आधारित खेती और सीमित आय के भरोसे जीवन यापन करने वाला यह गांव अब खस उत्पादन और पौधारोपण के जरिए नई पहचान गढ़ रहा है। गांव की महिला स्व-सहायता समूह की धान के कटोरा उत्पादक समिति द्वारा नवाचार को बढ़ावा देते हुए खस की खेती कर रही हैं।

परखंदा में अधिकांश परिवार खेती और मजदूरी पर निर्भर थे। बारिश पर आधारित कृषि के कारण हर साल अनिश्चितता बनी रहती थी। महिलाओं की भूमिका घर तक सीमित थी और आर्थिक फैसलों में उनकी भागीदारी लगभग नगण्य थी। ऐसे में महिलाओं ने संगठित होकर स्व-सहायता समूह बनाया और आजीविका के नए रास्ते तलाशने शुरू किए। वर्ष 2024-25 में मनरेगा और डीएमएफ मद से मिली स्वीकृति ने इस पहल को नई दिशा दी। 2.50 एकड़ भूमि में खस की खेती शुरू हुई एक ऐसी फसल, जो कम पानी में भी अच्छी उपज देती है और बहुउपयोगी होने के कारण बाजार में इसकी अच्छी मांग रहती है।

मेहनत से खिले खस के खेत

शुरुआत में खस की खेती महिलाओं के लिए नई थी, लेकिन विभागीय मार्गदर्शन और प्रशिक्षण ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। समूह की महिलाओं ने खुद ही भूमि तैयार की, पौधरोपण किया, सिंचाई और देखभाल की जिम्मेदारी संभाली। कुछ ही महीनों में खेत हरे-भरे खस पौधों से लहलहा उठे। खस की जड़ों से मिलने वाले सुगंधित तेल, इत्र, ठंडक देने वाले पर्दे और औषधीय उत्पादों ने आय के नए दरवाजे खोल दिए। इससे समूह की आमदनी लगातार बढ़ रही है।

हरियाली से सजा गांव

आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी परखंदा ने मिसाल कायम की है। गांव में 6 एकड़ क्षेत्र में फलदार और छायादार पौधों का वृक्षारोपण किया गया। महिलाओं ने ही पौधों की सुरक्षा, सिंचाई और देखभाल की जिम्मेदारी निभाई। खस जैसी नकदी फसल ने किसानों को पारंपरिक खेती से आगे सोचने का अवसर दिया है। अब समिति मूल्य संवर्धित उत्पादों-जैसे खस तेल, सुगंधित उत्पाद और हस्तशिल्प की दिशा में भी काम कर रही है। यदि प्रसंस्करण और विपणन की बेहतर व्यवस्था मिले, तो यह पहल बड़े स्तर पर रोजगार सृजन कर सकती है।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

खस उत्पादन से मिली आय ने महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। अब वे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और घरेलू जरूरतों को खुद पूरा कर रही हैं। कई परिवारों ने छोटे व्यवसाय भी शुरू किए हैं। महिलाएं बैंकिंग कार्य संभाल रही हैं, रिकार्ड रख रही हैं और अन्य गांवों की महिलाओं को प्रेरित कर रही हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा