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माओवादी अभियान से लौट रहे धमतरी निवासी आईटीबीपी के जवान खिलेश कुमार ध्रुव की मौत

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माओवादी अभियान से लौट रहे धमतरी निवासी आईटीबीपी के जवान खिलेश कुमार ध्रुव की मौत


धमतरी, 20 जुलाई (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में चल रहे माओवादी अभियान खत्म कर नारायणपुर से वापस असम लौट रहे आईटीबीपी के जवान खिलेश कुमार ध्रुव की सेहत बिगड़ने से असम में मौत हो गई।

देश सेवा में समर्पित मृतक आईटीबीपी का जवान खिलेश कुमार ध्रुव धमतरी जिले के ग्राम शंकरदाह निवासी थे। जवान के मौत की खबर से स्वजन, गांव समेत पूरे जिले में शोक की लहर है। मृतक जवान के शव पहुंचने के बाद 21 जुलाई मंगलवार को राजकीय सम्मान के साथ उनका गृहग्राम में अंतिम संस्कार किया जाएगा। मृतक जवान के स्वजन व गांव को उनके शव घर पहुंचने का इंतजार है।

जिला मुख्यालय धमतरी से लगे ग्राम शंकरदाह निवासी भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में पदस्थ जवान खिलेश कुमार ध्रुव 32 वर्ष का रविवार 19 जुलाई को गुवाहाटी-असम में सेहत बिगड़ने से उनकी मौत की खबर स्वजन को पहुंचा, तो स्वजन व पूरे गांव समेत जिले में शोक की लहर दौड़ गई, क्योंकि वह देश सेवा में समर्पित था। मृतक जवान के स्वजन व ग्रामीणों के अनुसार

जवान खिलेश कुमार ध्रुव ग्राम शंकरदहा निवासी थे। उनके बड़े भाई खूबचंद ध्रुव पंचायत विभाग में पंचायत सचिव के पद पर कार्यरत हैं। परिवार के अनुसार खिलेश कुमार ध्रुव अपनी सेवाओं का निर्वहन करते हुए छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित नारायणपुर कैंप से ड्यूटी पूरी कर वापस गुवाहाटी-असम लौट रहे थे। इस दौरान उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई। उपचार के लिए हर संभव प्रयास के बावजूद रविवार को उनका निधन हो गया। इस खबर से उनके स्वजन में दुखों का पहाड़ टूट गया। स्वजन का रो-रोकर बुराहाल है। स्वजन के अनुसार उनका पार्थिव शरीर गृह ग्राम शंकरदाह लाया जाएगा। मंगलवार 21 जुलाई को उनका शव गृहग्राम पहुंचने के बाद राजकीय सम्मान एवं धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

अंतिम दर्शन एवं अंत्येष्टि में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा विभिन्न वर्गों के लोगों के शामिल होने की संभावना है। जानकारी के अनुसार मृतक जवान खिलेश कुमार ध्रुव वर्ष 2013- 14 से आइटीबीपी में पदस्थ थे। वे अपने कर्तव्यनिष्ठ, सरल एवं मिलनसार स्वभाव के कारण परिवार, समाज और अपने साथियों के बीच विशेष पहचान रखते थे। उन्होंने देश की सीमाओं की सुरक्षा एवं राष्ट्र सेवा को अपना सर्वोच्च धर्म माना और पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन किया। उनके निधन से न केवल परिवार को अपूरणीय क्षति हुई है, बल्कि पूरे क्षेत्र ने एक होनहार, साहसी और राष्ट्रभक्त जवान को खो दिया है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा