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देर से बरसात होने पर किसान न हो चिन्तित, समय पर खरपतवार नियंत्रण से बढ़ेगी धान की पैदावार: प्रो. डॉ. डीके चन्द्राकर

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देर से बरसात होने पर किसान न हो चिन्तित, समय पर खरपतवार नियंत्रण से बढ़ेगी धान की पैदावार: प्रो. डॉ. डीके चन्द्राकर


रायपुर, 11 जुलाई (हि. स.)। खरीफ सीजन में मानसून के देर से सक्रिय होने के कारण अनेक किसान समय पर धान की बुवाई या रोपाई नहीं कर सके हैं। ऐसी स्थिति में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. डी.के. चन्द्राकर ने किसानों को चिंता न करने की सलाह देते हुए फसल प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण, नर्सरी, रोपाई एवं लेही पद्धति से बुवाई को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, ताकि समय पर बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सके।

डॉ. चन्द्राकर के अनुसार, जिन किसानों ने वर्षा के बाद धान की बुवाई या रोपाई कर ली है, उन्हें फसल की 20 से 25 दिन की अवस्था में खरपतवार नियंत्रण को प्राथमिकता देनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि खेत में खरपतवारों का प्रकोप बढ़ जाता है तो धान की उपज में 25 से 50 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। ऐसे क्षेत्रों में जहां श्रमिक उपलब्ध नहीं हैं, वहां निंदानाशकों का उपयोग कर खरपतवार नियंत्रण किया जा सकता है, जबकि श्रमिक उपलब्ध होने पर 25 और 40 दिन की अवस्था में निंदाई करना अधिक प्रभावी रहता है।

उन्होंने बताया कि, जिन किसानों की धान की नर्सरी 22 से 25 दिन की हो चुकी है, वे पानी की उपलब्धता के अनुसार खेतों की मचाई कर समय पर रोपाई करें। वहीं, लगातार वर्षा के कारण जो किसान नर्सरी तैयार नहीं कर सके हैं, वे लेही (वेट सीडिंग) पद्धति से अंकुरित बीजों का मचे हुए खेतों में छिड़काव कर सकते हैं। इसके बाद 20 से 25 दिन की अवस्था में निंदाई या खरपतवार नियंत्रण करते हुए फसल की नियमित देखभाल करना आवश्यक है।

डॉ. चन्द्राकर ने कहा कि, मानसून भले ही कुछ देर से सक्रिय हुआ हो, लेकिन अभी खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं। प्रदेश में हरेली पर्व तक धान की बुवाई और रोपाई का कार्य सामान्य माना जाता है। आने वाले दिनों में मानसून के और सक्रिय होने तथा अच्छी वर्षा की संभावना है। ऐसे में किसानों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। यदि सभी कृषि कार्य समय पर किए जाएं और फसल का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन किया जाए, तो अच्छी पैदावार मिलने की पूरी संभावना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / गायत्री प्रसाद धीवर