भारत के विकास से विपक्ष परेशान, अराजकता फैलाने की राजनीति कर रही कांग्रेस – संजय पाण्डेय
जगदलपुर, 09 अक्टूबर (हि.स.)। नगर निगम के महापौर संजय पाण्डेय ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर कांग्रेस और विपक्षी दलों पर उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा, विकास की गति और मजबूत होती अंतरराष्ट्रीय भूमिका से परेशान विपक्ष अब संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाकर नकारात्मक राजनीति कर रहा है। जनता के बीच अपने राजनीतिक मुद्दों को प्रभावी ढंग से रखने में विफल विपक्ष सड़क पर टकराव और संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करना और हर निर्णय को राजनीतिक संघर्ष में बदल देना जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका नहीं हो सकती। यदि किसी संवैधानिक पदाधिकारी के कामकाज पर आपत्ति है, तो उसके लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत तथ्य और तर्क प्रस्तुत किए जाने चाहिए। संविधान का सम्मान केवल भाषणों में नहीं, बल्कि राजनीतिक आचरण में भी दिखाई देना चाहिए।
महापौर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने बुनियादी ढांचे, डिजिटल सेवाओं, कनेक्टिविटी, अंतरिक्ष कार्यक्रम और वैश्विक कूटनीति सहित कई क्षेत्रों में अपनी पहचान मजबूत की है। भारत आज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी बात मजबूती से रख रहा है और वैश्विक मामलों में उसकी भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हुई है। उन्होंने कहा कि देश की इस प्रगति पर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और सकारात्मक सुझाव देने के बजाय कांग्रेस हर उपलब्धि में खामी तलाशने और हर मुद्दे को राजनीतिक विवाद बनाने में जुटी रहती है।
संजय पांडे ने कहा कि कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ उसकी आपत्ति का समाधान संवैधानिक प्रक्रिया से चाहिए या वह इसे राजनीतिक टकराव का हथियार बनाना चाहती है। उन्होंने सवाल उठाया कि संविधान की किताब हाथ में लेकर लोकतंत्र की दुहाई देने वाले नेता अराजकता को ही राजनीति का आधार क्यों बना रहे हैं? जब सर्वोच्च न्यायालय सबूत मांगती है और शपथ पत्र देने को कहती है तब राहुल गांधी क्यों भाग खड़े होते हैं। संवैधानिक संस्थाओं,चुनाव आयोग,कोर्ट, जांच एजेंसियों के ख़िलाफ़ अराजक बातें करना और फिर माफ़ी मांग लेना यही कांग्रेस की नियति बन गई है ।
महापौर ने दिल्ली में विपक्षी प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ कथित धक्का-मुक्की और दुर्व्यवहार के विवाद को लेकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महिला अधिकारों और सम्मान की बात करने वाले नेताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि राजनीतिक प्रदर्शनों में महिला पुलिस कर्मियों के साथ भी सम्मानजनक व्यवहार हो। किसी भी आरोप की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और कानून उल्लंघन प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। पांडे ने कहा कि लोकतंत्र में कोई भी नेता कानून से ऊपर नहीं है। राजनीतिक विरोध के नाम पर पुलिसकर्मियों के सम्मान और सार्वजनिक व्यवस्था की अनदेखी को सही नहीं ठहराया जा सकता।
महापौर संजय पांडे ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में विकास, तकनीकी विस्तार, आधारभूत सुविधाओं और वैश्विक भागीदारी को लेकर जो पहल हुई हैं, उन पर विपक्ष को तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए। लोकतंत्र में सरकार की आलोचना जरूरी है, लेकिन आलोचना के साथ वैकल्पिक नीतियां और समाधान प्रस्तुत करना भी विपक्ष की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार, विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा, किसानों को सुविधाएं और आम नागरिकों को बेहतर बुनियादी सेवाएं चाहिए। इन मुद्दों पर ठोस प्रस्ताव रखने के बजाय हर विषय को राजनीतिक टकराव में बदलना जनता के हित में नहीं है। महापौर ने कहा कि भारत की प्रगति किसी एक राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि पूरे देश का विषय है। राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन राष्ट्रीय संस्थाओं के प्रति जिम्मेदारी और देशहित सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों से नकारात्मक राजनीति छोड़कर विकास, जनहित और संवैधानिक मर्यादाओं पर आधारित सकारात्मक राजनीति करने की अपील की।
हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे

