सामुदायिक डबरी निर्माण से जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को मिलेगा बढ़ावा
धमतरी, 21 अक्टूबर (हि.स.)। जिले में जल संरक्षण, भूजल संवर्धन और ग्रामीण आजीविका के साधनों को मजबूत बनाने के उद्देश्य से सामुदायिक डबरी निर्माण की पहल की जा रही है। वीबी-जी रामजी योजनांतर्गत जिले में 34 सामुदायिक डबरी निर्माण कार्यों के लिए 172.13 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। इन कार्यों के माध्यम से वर्षा जल संचयन की क्षमता बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और कृषि आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है।
सामुदायिक डबरी के निर्माण से वर्षा जल को एकत्रित कर स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप उपयोग किया जा सकेगा। इससे विशेष रूप से वर्षा पर निर्भर खेती करने वाले किसानों को जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में सहायता मिलने की संभावना है। सामूहिक उपयोग की व्यवस्था से ग्रामीण परिवारों को लाभ पहुंचाने के साथ जल संरचनाओं के संरक्षण के प्रति सामुदायिक जिम्मेदारी भी विकसित होगी। डबरी में संचित जल का उपयोग स्थानीय परिस्थितियों और निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप कृषि एवं अन्य अनुमेय गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। पर्याप्त जल उपलब्धता और अनुकूल परिस्थितियों में मत्स्य पालन जैसी आजीविका गतिविधियों की संभावनाओं का भी आकलन किया जा सकेगा। इससे ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर विकसित करने में मदद मिल सकती है। इन संरचनाओं की दीर्घकालीन उपयोगिता सुनिश्चित करने के लिए निर्माण में निर्धारित तकनीकी मानकों, गुणवत्ता और विभागीय दिशा-निर्देशों का पालन करने पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी, समयबद्ध पूर्णता और निर्माण के बाद उचित रखरखाव पर भी ध्यान दिया जाएगा।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जयंत नाहटा ने बुधवार काे बताया कि सामुदायिक डबरी निर्माण जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन की दृष्टि से महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन बढ़ाने और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप जल संसाधनों की उपयोगिता विकसित करना है। उन्होंने जनपद पंचायतों एवं मैदानी अमले को कार्यों की नियमित निगरानी करने, निर्धारित समय-सीमा में निर्माण पूरा कराने तथा तकनीकी मानकों के अनुरूप गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि निर्मित परिसंपत्तियों का उचित रखरखाव और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होने से ग्रामीणों को दीर्घकालीन लाभ मिल सकेगा। सामुदायिक सहभागिता, गुणवत्तापूर्ण निर्माण और सुनियोजित उपयोग के माध्यम से ये डबरियां प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ ग्रामीण विकास को स्थायी मजबूती प्रदान कर सकती हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

