चिरायु टीम की पहल से तीन बच्चों को मिला नया जीवन, समय पर हुई बीमारी की पहचान
त्वरित रेफरल और विशेषज्ञ उपचार से जन्मजात हृदय रोग का सफल इलाज
धमतरी, 13 अगस्त (हि.स.)। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) के तहत बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच और गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान किस तरह जिंदगी बदल सकती है, इसका उदाहरण मगरलोड क्षेत्र में सामने आया है। चिरायु टीम-बी मगरलोड की सतर्कता से जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित तीन बच्चों की समय रहते पहचान हुई और उन्हें विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराया गया।
4 अगस्त को स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान केरिना कंवर (15 वर्ष), कुमकुम साहू (3 वर्ष) और युवेश कुमार (9 वर्ष) में जन्मजात हृदय रोग के संभावित लक्षण मिले। टीम ने बिना देरी किए आवश्यक जांच और विशेषज्ञ उपचार के लिए तीनों बच्चों को रायपुर के एक निजी अस्पताल में रेफर किया तथा उपचार की पूरी प्रक्रिया में समन्वय और लगातार फॉलोअप किया। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने आवश्यक जांच और परीक्षण किए, जिसमें जन्मजात हृदय संबंधी समस्या की पुष्टि हुई। चिकित्सकों ने तीनों बच्चों के लिए सर्जिकल उपचार आवश्यक बताया, जिसके बाद विशेषज्ञों की देखरेख में तीनों का सफल ऑपरेशन किया गया।
उपचार के बाद बच्चों के स्वास्थ्य में संतोषजनक सुधार हुआ और उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। चिरायु टीम द्वारा ऑपरेशन के बाद भी बच्चों के स्वास्थ्य की लगातार जानकारी ली जा रही है और आवश्यक फॉलोअप किया जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में टीम की भूमिका केवल बीमारी की पहचान तक सीमित नहीं रही, बल्कि बच्चों को उचित स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचाने, उपचार के लिए समन्वय स्थापित करने और उपचार के बाद उनकी स्थिति की निगरानी करने तक रही। यह सफलता बताती है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच कितनी महत्वपूर्ण है।
जन्मजात हृदय रोग कई बार शुरुआती अवस्था में स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता, ऐसे में नियमित स्क्रीनिंग के दौरान संभावित लक्षणों की पहचान गंभीर जटिलताओं से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। तीनों बच्चों का सफल उपचार उनके परिवारों के लिए राहत और खुशी का विषय है तथा समय पर स्वास्थ्य परीक्षण, प्रारंभिक पहचान, त्वरित रेफरल, विशेषज्ञ उपचार और सतत फॉलोअप के प्रभावी समन्वय का प्रेरक उदाहरण भी है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

