शहरी नियोजन सुधारों के लिए छत्तीसगढ़ को दो वर्षों में केंद्र सरकार से मिली 885 करोड़ रुपये की सहायता
रायपुर, 08 अक्टूबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने, निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने और शहरी विकास को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार किया है। इन सुधारों के लिए राज्य को वित्तीय वर्ष 2024-25 में 800 करोड़ रुपये तथा वित्तीय वर्ष 2025-26 में 85 करोड़ रुपये की सहायता प्राप्त हुई है। इस प्रकार दो वर्षों में कुल 885 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता मिली है।
भारत सरकार द्वारा डीरिगुलेशन और अनुपालन बोझ कम करने के लिए सुझाए गए सुधारों के अनुरूप राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। इस बदलाव से भूमि उपयोग संबंधी प्रावधान अधिक सरल, स्पष्ट और लचीले होंगे तथा आवासीय, वाणिज्यिक एवं औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के लिए नए अवसर उपलब्ध होंगे।
वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी के मार्गदर्शन में किए गए इन सुधारों का उद्देश्य शहरी नियोजन व्यवस्था को बदलती आर्थिक और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक व्यावहारिक बनाना है। नई व्यवस्था में विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों के लिए नेगेटिव लिस्ट आधारित मॉडल अपनाया गया है। इससे भूमि उपयोग से जुड़ी प्रक्रियाओं में अनावश्यक जटिलताएं कम होंगी और नागरिकों, उद्यमियों तथा निवेशकों को अधिक सुविधा मिलेगी।
सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने अब भूमि उपयोग नियमों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया है। यह पहल केंद्र सरकार की उस व्यापक नीति के अनुरूप है, जिसके अंतर्गत राज्यों में नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने, अनावश्यक प्रतिबंधों को कम करने और निवेश एवं आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
संशोधित भूमि विकास नियमों में विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों के लिए नेगेटिव लिस्ट आधारित व्यवस्था लागू की गई है। इस मॉडल के अंतर्गत प्रत्येक भूमि उपयोग श्रेणी में उन गतिविधियों को स्पष्ट रूप से चिन्हित किया गया है, जो संबंधित क्षेत्र के लिए अनुपयुक्त हैं। वहीं, अन्य अनुमत्य गतिविधियों के संचालन के लिए अधिक व्यापक अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। छत्तीसगढ़ ने भी इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए भूमि उपयोग नियमन को अधिक आधुनिक, लचीला और विकासोन्मुख बनाया है।
संशोधित नियमों की एक महत्वपूर्ण विशेषता विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों के बीच अनुमत्य गतिविधियों का विस्तार है। आम नागरिकों की दैनिक जरूरतों और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए मिश्रित भूमि उपयोग को प्रोत्साहित किया गया है।
नई व्यवस्था के अंतर्गत अस्पताल और स्कूल जैसी जन-आवश्यक सुविधाओं को आवासीय एवं वाणिज्यिक भूमि उपयोग में अनुमत्य किया गया है। इसी प्रकार कार्यालयों को भी आवासीय एवं वाणिज्यिक भूमि उपयोग में अनुमति दी गई है।
इस बदलाव से नागरिकों को अपने निवास स्थान के आसपास ही शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ेंगी। साथ ही, आवासीय और कार्यस्थलों के बीच की दूरी कम होने से आवागमन में लगने वाले समय और यातायात के दबाव को कम करने में भी मदद मिल सकेगी।
राज्य सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों और श्रमिकों की आवश्यकताओं को भी भूमि उपयोग सुधारों में विशेष महत्व दिया है। संशोधित प्रावधानों के अंतर्गत औद्योगिक क्षेत्रों में हॉस्टल, डॉर्मिटरी तथा संबंधित श्रमिकों के लिए आवास जैसी सुविधाओं को अनुमत्य गतिविधियों में शामिल किया गया है।
इसके अतिरिक्त मनोरंजन भूमि उपयोग श्रेणी में श्मशान एवं कब्रिस्तान से संबंधित आवश्यक गतिविधियों को भी अनुमत्य किया गया है। इस प्रकार संशोधित व्यवस्था में नागरिक सुविधाओं, सामाजिक आवश्यकताओं और आर्थिक गतिविधियों के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया गया है।
हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा

