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एलडब्ल्यूई प्रभावित बस्तर में विकास के लिए केंद्र सरकार ने डीएमएफ नियमों में दी विशेष छूट

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एलडब्ल्यूई प्रभावित बस्तर में विकास के लिए केंद्र सरकार ने डीएमएफ नियमों में दी विशेष छूट


जगदलपुर, 31 अगस्त (हि.स.)। बस्तर में विकास की रफ्तार बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म (एलडब्ल्यूई) प्रभावित क्षेत्रों के लिए जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) के नियमों में विशेष छूट दी गई है। इसके तहत खनिज वाले जिलों में जमा होने वाली डीएमएफ राशि को अब दूरदराज के संवेदनशील और पिछड़े क्षेत्र में भी खर्च किया जा सकेगा। इस सीमा के कारण बस्तर के कई दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास राशि पहुंचाना मुश्किल था।

केंद्र की नई छूट से यह भौगोलिक सीमा प्रभावी रूप से समाप्त हो गई है। यह विशेष व्यवस्था वित्तीय वर्ष 2027-28 तक लागू रहेगी। इसका लाभ बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर और कांकेर को मिलेगा। इन इलाकों में अब पक्की सड़क, पेयजल और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार का रास्ता खुला है। भौमिकी एवं खनिकर्म विभाग के संचालक रजत बंसल के अनुसार दंतेवाड़ा के कुल डीएमएफ फंड का 50 प्रतिशत हिस्सा अर्थात 300 कराेड़ रूपये बीजापुर, नारायणपुर, सुकमा एवं कांकेर जिले को वितरित किया गया है।

राज्य को हर साल कोरबा से लगभग 700 करोड़ रुपये और दंतेवाड़ा से करीब 600 करोड़ रुपये का डीएमएफ फंड मिलता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 16,738 करोड़ रुपये का खनिज राजस्व जुटाया गया। अगले वित्तीय वर्ष में इसके 19 हजार करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है। नक्सल गतिविधियों में कमी के बाद अब बस्तर में सरकार के सामने विकास और लोगों का भरोसा मजबूत करने की चुनौती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, केवल सुरक्षा कैंप स्थापित करना पर्याप्त नहीं होगा।

ग्रामीण क्षेत्रों तक बिजली, 4जी/5जी नेटवर्क, पोर्टा केबिन स्कूल और अस्पताल जैसी सुविधाएं पहुंचाना भी जरूरी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पहले ही कह चुके हैं कि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले बस्तर के हर गांव तक विकास की रोशनी पहुंचाना सरकार का प्रमुख लक्ष्य है। डीएमएफ नियमों में मिली यह छूट इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे