जनगणना में छत्तीसगढ़ी को शामिल करने की मांग तेज, उग्र आंदोलन की चेतावनी
कोरबा, 23 अप्रैल (हि. स.)। छत्तीसगढ़ी भाषा को जनगणना में शामिल करने की मांग को लेकर कोरबा में आज गुरुवार को बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ) और छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के संयुक्त नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने रैली निकालकर कलेक्टर को भारत सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा। संगठनों ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि आगामी 2026-27 की जनगणना में छत्तीसगढ़ी भाषा को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।
रैली के दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि छत्तीसगढ़ी केवल एक बोली नहीं, बल्कि प्रदेश के करोड़ों लोगों की पहचान और अस्मिता का प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्व-जनगणना पोर्टल में अन्य भाषाओं को स्थान दिया गया है, जबकि राज्य की राजभाषा छत्तीसगढ़ी को नजरअंदाज किया गया है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
संगठनों के जिला अध्यक्ष जैनेन्द्र कुर्रे और सुरजीत सोनी ने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा का समृद्ध इतिहास और व्याकरण है, इसके बावजूद इसे उचित सम्मान नहीं मिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ी बोलने वालों की संख्या कई मान्यता प्राप्त भाषाओं से अधिक है, फिर भी इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान नहीं मिला है।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि 2026-27 की जनगणना में छत्तीसगढ़ी भाषा को शामिल नहीं किया गया, तो पूरे प्रदेश में जनगणना का बहिष्कार किया जाएगा और आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा। उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ की अस्मिता से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।
इस दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिनमें डॉ. महावीर यादव, सुरेश पटेल, नोभीत साहू, देवहंस, हरि चौहान, चंचल महंत, ओम केवट, राकेश यादव और राकेश सूर्यवंशी सहित अन्य पदाधिकारी शामिल थे।
हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी

