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एमसीबी : बिहान योजना से बदली किस्मत, सेंट्रिंग प्लेट व्यवसाय से आत्मनिर्भर बनीं डोंगरीटोला की फूलकली

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एमसीबी : बिहान योजना से बदली किस्मत, सेंट्रिंग प्लेट व्यवसाय से आत्मनिर्भर बनीं डोंगरीटोला की फूलकली


मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, 17 जुलाई (हि.स.)। छत्तीसगढ़ में मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के विकासखंड भरतपुर के अंतर्गत ग्राम डोंगरीटोला की रहने वाली फूलकली ने यह साबित कर दिया है कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन मिले, तो सीमित संसाधनों में भी आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी जा सकती है।

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) 'बिहान' से जुड़कर उन्होंने न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारा है, बल्कि वे ग्रामीण क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। 'बिहान' योजना आज ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों के माध्यम से संगठित कर उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का काम कर रही है।

इस सफलता की शुरुआत 4 अक्टूबर 2019 को हुई, जब ग्राम डोंगरीटोला में 'अनामिका महिला स्व-सहायता समूह' का गठन किया गया। इस समूह में गांव की 10 महिलाएं शामिल हुईं, जिनमें फूलकली भी थीं। एक साधारण गृहिणी के रूप में जीवन जी रही फूलकली के मन में अपने परिवार को आर्थिक मजबूती देने का सपना था। उन्होंने समूह की बैठकों में नियमित रूप से भाग लेना शुरू किया और आजीविका के नए अवसरों को तलाशने का संकल्प लिया। बिहान मिशन की विकासखंड प्रबंधन इकाई के सतत मार्गदर्शन और क्षमता विकास कार्यक्रमों ने उनके इस संकल्प को आगे बढ़ाने में मदद की।

व्यवसाय शुरू करने के लिए फूलकली ने सबसे पहले समूह से प्राप्त रिवॉल्विंग फंड से 15 हजार रुपये का ऋण लिया, जिससे उन्होंने परिवार की प्राथमिक जरूरतों को पूरा किया। इसके बाद, समूह को मिली सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) से उन्हें 60 हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। इस राशि में अपनी ओर से कुछ पैसे जोड़कर उन्होंने कुल एक लाख रुपये के निवेश के साथ सेंट्रिंग प्लेट का व्यवसाय शुरू किया। शुरुआत में उन्हें कई तरह की व्यावहारिक और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, लेकिन अपनी कड़ी मेहनत और लगन के बल पर उन्होंने धीरे-धीरे अपने व्यवसाय को जमा लिया।

आज फूलकली का यह सेंट्रिंग प्लेट व्यवसाय बेहद सफलतापूर्वक चल रहा है। इस कारोबार से उन्हें हर महीने लगभग 10 हजार रुपये की नियमित आय हो रही है, जिससे वे सालाना करीब 1 लाख 20 हजार रुपये का शुद्ध लाभ कमा रही हैं। इस आमदनी ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है। अब वे घरेलू खर्चों को आसानी से पूरा करने के साथ-साथ भविष्य के लिए बचत भी कर रही हैं। जो फूलकली कभी सिर्फ घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित थीं, वे आज अपने परिवार का मुख्य आर्थिक सहारा बन चुकी हैं।

फूलकली की यह सफलता अब केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं रह गई है, बल्कि पूरे डोंगरीटोला गांव के लिए एक मिसाल बन चुकी है। उन्हें देखकर गांव की अन्य महिलाएं भी स्वरोजगार अपनाने के लिए स्व-सहायता समूहों से जुड़ रही हैं। अनामिका महिला स्व-सहायता समूह आज ग्रामीण महिलाओं की सामूहिक शक्ति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गया है। फूलकली की यह यात्रा बिहान मिशन के उस मूल उद्देश्य को साकार करती है, जिसका लक्ष्य हर ग्रामीण महिला को एक सम्मानजनक, समृद्ध और आत्मनिर्भर जीवन प्रदान करना है।

हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह