भूपेश सरकार के कार्यकाल में आदिवासियों का 32 फीसदी आरक्षण छीनने का प्रयास किया : विकास मरकाम
रायपुर, 27 अगस्त (हि.स.)। छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परम्परा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष तथा भाजपा के वरिष्ठ नेता विकास मरकाम ने कांग्रेस और पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार पर आदिवासी हितों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को आदिवासियों के मुद्दों पर बैठक करने के बजाय पिछले पांच वर्षों में उनके साथ हुए कथित अन्याय के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
भाजपा कार्यालय एकात्म परिसर में गुरुवार को आयोजित प्रेसवार्ता में मरकाम ने आरोप लगाया कि भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में आदिवासियों के 32 प्रतिशत आरक्षण को समाप्त करने का प्रयास किया गया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस से जुड़े एक व्यक्ति की याचिका और सरकार की कमजोर पैरवी के कारण आरक्षण निरस्त हुआ, जबकि बाद में भाजपा नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय में पक्ष रखकर आरक्षण की रक्षा की।
मरकाम ने कहा कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने बस्तर और सरगुजा सहित पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर स्थानीय युवाओं को शत-प्रतिशत भर्ती का अधिकार दिया था, जिसे कांग्रेस सरकार ने समाप्त कर दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन में तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिलने वाला बोनस बंद कर दिया गया और चरण पादुका योजना भी समाप्त कर दी गई। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार तेंदूपत्ता की खरीद 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से कर रही है, जिससे संग्राहकों की आय बढ़ी है।
मरकाम ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने आदिवासी समाज को केवल वोट बैंक के रूप में देखा और समाज को विभाजित करने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने आदिवासी समाज को सम्मानजनक प्रतिनिधित्व दिया है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा ने आदिवासी नेतृत्व को आगे बढ़ाया है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकारें आदिवासी समाज के स्वाभिमान, संरक्षण और समग्र विकास के लिए लगातार कार्य कर रही हैं, जबकि कांग्रेस का इतिहास समाज को बांटने की राजनीति का रहा है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / गेवेन्द्र प्रसाद पटेल

