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भखारा के नमकीन उद्योग की सराहनीय पहल, 250 लीटर प्रयुक्त तेल जैव ईंधन के लिए सौंपा

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भखारा के नमकीन उद्योग की सराहनीय पहल, 250 लीटर प्रयुक्त तेल जैव ईंधन के लिए सौंपा


धमतरी, 03 मार्च (हि.स.)। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की प्रयुक्त खाद्य तेल पुनः उपयोग (आरयूसीओ) पहल के तहत जिले के खाद्य प्रतिष्ठानों में उपयोग किए गए खाद्य तेल को खाद्य श्रृंखला से बाहर कर जैव ईंधन में परिवर्तित करने का अभियान शुरू किया गया है। इसी क्रम में भखारा स्थित भारत नमकीन गृह उद्योग ने अनुकरणीय पहल करते हुए पिछले छह माह में 250 लीटर प्रयुक्त खाद्य तेल का संग्रह कर उसे एफएसएसएआई की अधिकृत संस्था के एन पी ग्रीन को जैव ईंधन (बायो डीजल) निर्माण के लिए सौंपा गया है। इस पहल का उद्देश्य जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के साथ-साथ ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।

तलने की प्रक्रिया के दौरान तेल के कई गुण बदल जाते हैं बार - बार तलने पर कुल ध्रुवीय यौगिक (टीपीसी) बनते हैं। इनकी विषाक्तता उच्च रक्तचाप एथेरोस्क्लेरोसिस, अल्जाइमर और यकृत रोग जैसी कई बीमारियों से जुड़ी है। उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एफएसएसएआई ने कुल ध्रुवीय यौगिकों की सीमा 25 प्रतिशत निर्धारित की है जिसके बाद वनस्पति तेल का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। एक जुलाई 2018 से सभी खाद्य व्यवसाय संचालकों (एफबीओ) को इन नियमों का पालन करते हुए तलने के दौरान तेल की गुणवत्ता की निगरानी करना अनिवार्य है। एफएसएसएआई की अधिकृत एजेंसियां डोर टू डोर जाकर उपयोग हुआ खाद्य तेल खरीदती हैं। अधिक जानकारी और तेल संग्राहक एजेंसियों की सूची के लिए आधिकारिक वेबसाइट का अवलोकन कर सकते हैं।

भखारा स्थित भारत नमकीन गृह उद्योग द्वारा नमकीन का निर्माण किया जाता है। इनके द्वारा एफएसएसएआई गाइडलाइन के अनुसार पिछले छह महीनों में 250 लीटर उपयोग किया हुआ खाद्य तेल संग्रहित कर इसे बायोडीजल निर्माण के लिए के एन पी ग्रीन को विक्रय किया गया है। इनके संचालक भारत निषाद ने बताया कि एक ही खाद्य तेल का बार-बार तलने में इस्तेमाल करने से नमकीन का स्वाद बदल जाता है। नमकीन बनाने के दौरान ग्राहकों के स्वाद एवं सेहत दोनों का बराबर ध्यान रखा जाता है। एक ही तेल को बार बार गर्म कर खाद्य पदार्थ बनाए जाने से स्वाद में अंतर आता है। साथ ही ग्राहकों की सेहत भी खराब होती है। पहले उपयोग हुए तेलों को निकालकर साबुन बनाने के लिए विक्रय कर रहे थे। लेकिन अब खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के मार्गदर्शन में उपयोग किया हुआ खाद्य तेल संग्रह कर इसे बायोडीजल निर्माण के लिए दे रहे हैं।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग धमतरी के अभिहित अधिकारी सर्वेश कुमार यादव ने जिले खाद्य कारोबारियों से अपील की है कि खाद्य तेल का बार-बार उपयोग न करें। इसका लगातार उपयोग स्वाद को प्रभावित करने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। उपयोग किया हुआ तेल नियमित रूप से संग्रह करें और हर दो से तीन माह में एफएसएसएआई की अधिकृत एजेंसी को सौंपें। किसी भी स्थिति में इस तेल को खाद्य श्रृंखला में दोबारा न जाने दें। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए जिला कार्यालय में खाद्य सुरक्षा अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा