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राखी से पहले भैया का बहनों को शगुन, महतारी वंदन की 31वीं किस्त से प्रमिला के चेहरे पर आई मुस्कान

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राखी से पहले भैया का बहनों को शगुन, महतारी वंदन की 31वीं किस्त से प्रमिला के चेहरे पर आई मुस्कान


राखी से पहले भैया का बहनों को शगुन, महतारी वंदन की 31वीं किस्त से प्रमिला के चेहरे पर आई मुस्कान

बलरामपुर, 25 अगस्त (हि.स.)। रक्षाबंधन का पर्व नजदीक आते ही बहनों में भाई की कलाई पर राखी बांधने और मिठाई खिलाने को लेकर उत्साह है। आज मंगलवार को विकासखंड बलरामपुर के ग्राम पंचायत भनौरा निवासी प्रमिला विश्वकर्मा की त्योहार की खुशियां उस समय और बढ़ गईं, जब महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त की राशि उनके खाते में पहुंची। रक्षाबंधन से पहले मिली यह राशि उनके लिए भाई के प्रति स्नेह के साथ आर्थिक संबल का शगुन बनकर आई है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त जारी किए जाने के बाद प्रदेश की लाखों महिलाओं के खातों में सहायता राशि पहुंची। प्रमिला के लिए यह राशि केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि रक्षाबंधन के मौके पर अपने भाई के लिए राखी और मिठाई खरीदने का सहारा भी बनी है।

महतारी वंदन योजना के तहत प्रमिला को हर महीने एक हजार रुपये की सहायता राशि मिलती है। अब तक उन्हें 30 हजार रुपये की राशि प्राप्त हो चुकी है। वह बताती हैं कि रक्षाबंधन से ठीक पहले मिली राशि उनके लिए बेहद खास है। इसी राशि से वह अपने भाई के लिए राखी और मिठाई खरीदकर पूरे उत्साह के साथ रक्षाबंधन मनाएंगी।

‘विष्णु भैया का शगुन हमारे लिए खास’

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को आत्मीयता से ‘विष्णु भैया’ कहते हुए प्रमिला ने खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन के अवसर पर भैया की ओर से मिला यह शगुन उनके लिए बहुत खास है। इस राशि से वह अपने भाई के लिए राखी और मिठाई खरीदेंगी। उन्होंने महतारी वंदन योजना के माध्यम से मिल रहे सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

प्रमिला ने बताया कि रक्षाबंधन से पहले मिली यह राशि उनके लिए आर्थिक मजबूती के साथ अपनत्व और सम्मान का एहसास भी लेकर आई है। उनके अनुसार नियमित रूप से मिलने वाली सहायता राशि महिलाओं को अपनी जरूरतें पूरी करने, छोटे-छोटे सपने संवारने और परिवार के महत्वपूर्ण अवसरों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने में मदद कर रही है।

इस रक्षाबंधन महतारी वंदन योजना की राशि प्रमिला के लिए त्योहार की खुशियों में एक नया रंग जोड़ने वाली साबित हुई है। राखी के धागे में भाई-बहन के स्नेह और विश्वास के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता का भाव भी जुड़ गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय