चांगरो के जीराफूल चावल को मिलेगी नई पहचान, किसानों और महिला समूहों की आय बढ़ाने की तैयारी
बलरामपुर, 23 अक्टूबर (हि.स.)।बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ विकासखंड के ग्राम चांगरो में उत्पादित पारंपरिक जीराफूल चावल को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में पहल की जा रही है।
आज शुक्रवार को सामरी विधायक उद्धेश्वरी पैकरा, कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी और जिला पंचायत सीईओ आशुतोष चतुर्वेदी ने गांव पहुंचकर किसानों और स्व-सहायता समूह की महिलाओं से चर्चा की। इस दौरान जीराफूल चावल की ब्रांडिंग, बेहतर विपणन और उत्पादन का दायरा बढ़ाने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया।
चांगरो के किसान लंबे समय से जैविक पद्धति से जीराफूल चावल की खेती कर रहे हैं। अपनी विशिष्ट सुगंध और छोटे दानों के लिए पहचाने जाने वाली इस पारंपरिक किस्म को मार्च 2019 में जीआई टैग मिला था। इसका प्राकृतिक स्वाद और खुशबू इसे दूसरी किस्मों से अलग पहचान देते हैं। बाजार में इसकी कीमत लगभग 100 से 120 रुपये प्रति किलो तक बताई जाती है।
ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठकर चर्चा के दौरान विधायक उद्धेश्वरी पैकरा ने किसानों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने रासायनिक खाद के उपयोग से बचते हुए जैविक खेती को बढ़ावा देने की अपील की। विधायक ने कहा कि चांगरो का जीराफूल चावल क्षेत्र की विशिष्ट पहचान है। इसे जिले तक सीमित रखने के बजाय राज्य और देश के व्यापक बाजार तक पहुंचाने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने किसानों और महिलाओं को इस कार्य में हरसंभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया।
कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा कि जीराफूल चावल की बेहतर मार्केटिंग और प्रभावी ब्रांडिंग के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाएगी, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। उन्होंने बताया कि शंकरगढ़ क्षेत्र के करीब 30 गांवों में इसकी खेती की जा रही है। उत्पादन क्षेत्र का विस्तार करने के साथ किसानों और इस कार्य से जुड़ी स्व-सहायता समूह की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के प्रयास किए जाएंगे।
गांव में जीराफूल चावल के उत्पादन और उससे जुड़ी गतिविधियों में 10 स्व-सहायता समूह सक्रिय हैं। प्रत्येक समूह में 12 से 15 महिलाएं काम कर रही हैं। कलेक्टर ने इन समूहों को शंकरगढ़ में स्थापित आत्मनिर्भर बलरामपुर किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) से जोड़ने के निर्देश दिए। इससे किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाली कृषि सामग्री और सेवाएं कम लागत पर उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
बैठक में किसानों को स्थानीय स्तर पर बाजार उपलब्ध कराने के लिए राइस मिल स्थापित करने और पारंपरिक लकड़ी की ढेंकी के आधुनिक विकल्प के रूप में इलेक्ट्रिक ढेंकी लगाने पर भी चर्चा हुई। इन प्रयासों से जीराफूल चावल के प्रसंस्करण, विपणन और बिक्री को बढ़ावा देने के साथ ग्रामीण किसानों और महिला समूहों की आय बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा।
हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय

