अक्षय तृतीया : मंडप सजाकर हुई गुड्डे-गुड़ियों की शादी, बच्चों में दिखा उत्साह
धमतरी, 19 अप्रैल (हि.स.)। अक्षय तृतीया का पर्व रविवार को नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बच्चों ने खास तौर पर गुड्डे-गुड़ियों की शादी रचाकर त्योहार की खुशियों को जीवंत बना दिया। घरों और मोहल्लों में सजे छोटे-छोटे मंडप आकर्षण का केंद्र रहे, जहां बच्चों ने पूरे रीति-रिवाज के साथ शादी की रस्में निभाईं।
बच्चों ने आम के पत्तों, फूल-पत्तियों और रंगीन सजावट से मंडप तैयार किया। इसके बाद गुड्डे-गुड़ियों को तेल-हल्दी लगाकर, मुकुट पहनाकर मंडप में बैठाया गया और विवाह की सभी रस्में निभाई गईं। लोकगीतों की गूंज के बीच घराती और बाराती की भूमिका भी बच्चों और पड़ोसियों ने निभाई। इस दौरान घर के बड़े-बुजुर्गों ने बच्चों को आशीर्वाद दिया और उपहार देकर उनका उत्साह बढ़ाया। इधर ग्रामीण अंचलों में लोगों ने अपने ईष्ट देव की पूजा-अर्चना कर अच्छी वर्षा और भरपूर फसल की कामना की। पूरे दिन गांवों में धार्मिक वातावरण बना रहा और लोगों ने अपने कामकाज से विराम लेकर पर्व को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया। अक्षय तृतीया के अवसर पर स्वर्ण आभूषण खरीदने की परंपरा भी निभाई गई। सराफा बाजार में सुबह से ही ग्राहकों की भीड़ नजर आई। लोगों ने शगुन के तौर पर सोने के आभूषण और सिक्के खरीदे। सराफा व्यापारी ज्ञानचंद लुनावत ने बताया कि अब लोग सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में भी देख रहे हैं, जिससे सिक्कों और हल्के डिजाइन वाले गहनों की मांग बढ़ी है। कच्चे क्वार्टर क्षेत्र स्थित आभूषण दुकानों में देर शाम तक रौनक बनी रही। पंडित राजकुमार तिवारी के अनुसार शास्त्रों में अक्षय तृतीया को अत्यंत शुभ दिन माना गया है। इस दिन विवाह सहित किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत बिना मुहूर्त देखे की जा सकती है। मान्यता है कि इस दिन किए गए कार्यों का फल अक्षय रहता है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

