नाबालिगों के वाहन चलाने पर प्रशासन सख्त, दोबारा पकड़े जाने पर पालकों पर होगी कानूनी कार्रवाई
धमतरी, 31 जुलाई (हि.स.)। जिले में सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने के खिलाफ संयुक्त अभियान शुरू कर दिया है। इसी क्रम में कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने 31 जुलाई काे जिले के सभी शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों के प्राचार्यों की वर्चुअल बैठक लेकर स्पष्ट निर्देश दिए कि कोई भी नाबालिग छात्र-छात्रा बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के दोपहिया या अन्य वाहन लेकर विद्यालय नहीं पहुंचे। यदि कोई विद्यार्थी वाहन लेकर आता है तो तत्काल उसके पालकों को बुलाकर समझाइश दी जाए तथा इसकी जानकारी प्रशासन को भी दी जाए। बैठक में पुलिस अधीक्षक भावना पाण्डेय, सहायक संचालक शिक्षा यदुनंदन वर्मा एवं विभिन्न विद्यालयों के प्राचार्य मौजूद रहे। कलेक्टर ने कहा कि नाबालिगों द्वारा वाहन चलाना न केवल मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि उनके जीवन और अन्य लोगों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है। उन्होंने सभी विद्यालयों में शीघ्र पालक-शिक्षक बैठक आयोजित कर अभिभावकों को सड़क सुरक्षा, यातायात नियमों और मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी देने के निर्देश दिए। साथ ही बच्चों के लिए स्कूल बस, साइकिल, सार्वजनिक परिवहन अथवा पालकों द्वारा सुरक्षित आवागमन जैसी वैकल्पिक व्यवस्था अपनाने पर जोर देते हुए इसे लागू करने के लिए एक सप्ताह का समय निर्धारित किया गया है। कलेक्टर ने यह भी निर्देश दिए कि विद्यालयों के आसपास असामाजिक तत्वों की गतिविधियां, नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री अथवा विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़ी किसी भी प्रकार की शिकायत मिलने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध तत्काल कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने विद्यालयों में योग, खेलकूद, नैतिक शिक्षा, यातायात जागरूकता और नशामुक्ति संबंधी गतिविधियों को नियमित रूप से संचालित करने पर भी विशेष बल दिया। पुलिस अधीक्षक भावना पाण्डेय ने बताया कि जिले में नाबालिग वाहन चालकों के खिलाफ विशेष अभियान लगातार चलाया जा रहा है। पहली बार पकड़े जाने पर पालकों को यातायात थाना बुलाकर समझाइश दी जा रही है और उनका रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है, जबकि दोबारा उल्लंघन करने पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत पालकों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में 25 हजार रुपये तक के जुर्माने, तीन वर्ष तक के कारावास अथवा दोनों का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि प्रवर्तन कार्रवाई के साथ-साथ जिले के 36 विद्यालयों में जागरूकता अभियान चलाया जा चुका है, जिसमें 10 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं को सड़क सुरक्षा, यातायात नियमों, साइबर सुरक्षा, नशामुक्ति और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया गया। कलेक्टर ने पालकों, विद्यालय प्रबंधन और नागरिकों से अपील की कि बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उन्हें किसी भी परिस्थिति में बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन चलाने की अनुमति न दें, क्योंकि सुरक्षित बचपन ही सुरक्षित भविष्य और सुरक्षित समाज की मजबूत नींव है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

