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आईटीआर में वन्यजीवों की मौजूदगी का पता लगाने 200 पगमार्क इम्प्रेशन पैड बनेंगे

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आईटीआर में वन्यजीवों की मौजूदगी का पता लगाने 200 पगमार्क इम्प्रेशन पैड बनेंगे


जगदलपुर, 30 अक्टूबर (हि.स.)। घने जंगलों के बीच वन्यजीवों की मौजूदगी का पता लगाने जंगल में बाघ कहां से गुजर रहा है, तेंदुए की आवाजाही किन रास्तों पर है और वन्यजीव पानी व भोजन की तलाश में किस दिशा में बढ़ रहे हैं, इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए इंद्रावती टाइगर रिजर्व बीजापुर में पगमार्क इम्प्रेशन पैड (पीआईपी) तैयार किए जा रहे हैं। इंद्रावती टाइगर रिजर्व में लगभग 200 ऐसे पैड बनाने की योजना है। इस पहल से 133 बीट में वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने और उनके आवागमन वाले रास्तों की पहचान करने में मदद मिलेगी।

पीआईपी तैयार करने के लिए जंगल की पगडंडियों और वन्यजीवों के गुजरने वाले रास्तों पर ऊपरी सख्त मिट्टी को लगभग एक इंच तक हटाया जाता है। फिर वहां बारीक, छनी हुई रेत या नरम मिट्टी बिछाई जाती है। इस तरह तैयार सतह पर जैसे ही कोई वन्यजीव गुजरता है, उसके पैरों के निशान उभर आते हैं। जंगल में वन्यजीव कई बार सामने आए बिना गुजर जाते हैं, लेकिन उनके पैरों के निशान उनकी मौजूदगी का अहम संकेत दे सकते हैं। इसी आधार पर पीआईपी तैयार करने की पहल को वन्यजीव निगरानी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इन पैड पर दर्ज पगमार्क वन विभाग को जंगल के भीतर वन्यजीवों की गतिविधियों को समझने में मदद करेंगे। पीआईपी में वन्यजीवों के साथ-साथ शिकारियों के भी पग के निशान मिलेंगे।

इंद्रावती टाइगर रिजर्व बीजापुर के क्षेत्रीय निदेशक उत्तम कुमार गुप्ता ने शुक्रवार काे बताया कि पगमार्क इम्प्रेशन पैड वन्यजीवों की निगरानी को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में अहम साबित हो सकता है। जंगल में दर्ज होने वाला हर निशान वन्यजीवों की गतिविधियों को समझने का एक नया संकेत देगा। हालांकि पगमार्क से मिलने वाले संकेतों का सही आंकलन और अन्य निगरानी तरीकों के साथ उनका उपयोग ही संरक्षण की रणनीति को अधिक मजबूत बनाएगा।

उल्लेखनीय है कि बीजापुर जिले में स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व छत्तीसगढ़ के प्रमुख वन्यजीव क्षेत्रों में शामिल है। आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना की सीमाओं से लगे इस क्षेत्र में घने जंगल और विविध प्राकृतिक आवास हैं। यहां बाघ, तेंदुआ, वनभैंसा, भालू, चीतल, सांभर, गौर, जंगली सूअर और ऊदबिलाव सहित अनेक वन्यजीव पाए जाते हैं। विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों और छोटे जीवों के लिए भी यह वन क्षेत्र महत्वपूर्ण आश्रय स्थल है। पीआईपी के जरिए केवल बड़े शिकारी ही नहीं, बल्कि चीतल, सांभर, गौर और अन्य वन्यजीवों की आवाजाही के संकेत भी मिल सकते हैं। इससे जंगल के अलग-अलग हिस्सों में वन्यजीवों की मौजूदगी को समझने में मदद मिलेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे